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विवि में सिंथेटिक ट्रैक स्वीमिंग पूल की मंजूरी

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विवि में सिंथेटिक ट्रैक स्वीमिंग पूल की मंजूरी - फोटो : विवि में सिंथेटिक ट्रैक स्वीमिंग पूल की मंजूरी
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बरेली।
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एमजेपी रुहलेखंड विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हुई क्रीड़ा कार्यकारिणी की बैठक में सिंथेटिक ट्रैक और स्वीमिंग पूल बनाने की मंजूरी मिल गई। इसके लिए विवि के पास बजट भी है। प्राथमिकता से सिंथेटिक ट्रैक का कार्य पूरा किया जाएगा और उसके बाद स्वीमिंग पूल का।
कुलपति आवास के पास खाली जमीन पर करीब तीस हजार वर्ग मीटर का एक अलग खेल मैदान बनाया जाएगा, जिसमें फुटबाल और क्रिकेट की प्रतियोगिताएं होंगी। अब विवि और संबद्ध कॉलेजों में जो भी प्रतियोगिताएं होंगी वो दीन दयाल उपाध्याय शताब्दी वर्ष के नाम से होंगी। कार्यकारिणी में पास प्रस्ताव अब अगस्त में होने वाली क्रीड़ा परिषद की बैठक में रखे जाएंगे। बैठक में कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला, क्रीड़ा सचिव प्रोफेसर एके जेटली, आरएसओ मुद्रिका पाठक, कन्या महाविद्यालय भूड़ की प्राचार्य डॉ. कुहू दत्ता व अन्य कार्यकारिणी से सदस्य मौजूद रहे।
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पूरे साल खेल सकेंगे खिलाड़ी
बैठक में स्पोर्ट्स कैलेंडर भी जारी किया गया। प्रतियोगिताएं सितंबर से होंगी। अब कॉलेज और विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों को पूरे साल खेलने का मौका मिलेगा। भारतीय विश्वविद्यालय संघ खेलों के विकास के लिए अब नेशनल स्पोर्ट्स प्रमोशन आर्गनाइजेशन के रूप में कार्य करेगा। अब छात्रों को वर्ल्ड यूनिवर्सिटी तक खेलने का मौका मिलेगा। अंतर महाविद्यालय से विश्वविद्यालय की टीम चुनी जाएगी और अंतर विश्वविद्यालीय से इंडियन यूनिवर्सिटी और यहां से टीम वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में खेलने को मिलेगा।

टीम पर निर्भर करेगा खेलों का आवंटन
पिछले साल टीमों को बाहर भेजने को लेकर काफी विवाद हुआ था। विवि ने बेसबाल, सॉफ्टबाल, हैंडबाल की टीमों को नहीं भेजा था। इस बार जिन कॉलेजों में टीम बनने लायक नहीं है वहां खेलों का आवंटन नहीं होगा। इसके लिए कॉलेजों को एआईयू मानकों के अनुसार एक प्रोफार्मा भरना होगा। खेलों के लिए कॉलेज में एक ज्यूरी बनेगी, जिसमें पर्यवेक्षक, खेल विशेषज्ञ, विवि से नामित एक सदस्य और आयोजक सचिव होंगे। जो भी विवाद होंगे ज्यूरी निपटाएगी।

स्टेडियम से मिलेंगे कोच
प्रशिक्षण के लिए कोच की दिक्कत नहीं होगी। बास्केटबाल, वॉलीबाल समेत जिस भी खेल के लिए कोच की जरूरत होगी स्पोर्ट्स स्टेडियम से मिलेंगे। आरएसओ मुद्रिका पाठक ने इस पर सहमति दे दी है।

...तो माइग्रेशन नहीं मिलेगा
खेल कोटे से पिछले साल महज चार एडमिशन हुए थे। वैसे हर साल 20-25 एडमिशन खेल कोटे से होते थे। अब खेल कोटे से जो भी प्रवेश होंगे सर्टिफिकेट के साथ खिलाड़ी को उस स्तर का प्रदर्शन भी करके दिखाना होगा। पिछले साल दो खिलाड़ियों ने जानबूझकर खराब प्रदर्शन किया था। कॉलेजों को निर्देश है कि अगर खेल कोटे से प्रवेश लेकर कोई एडमिशन दूसरे विवि में लेता है तो उसका माइग्रेशन रोक लिया जाए।

सालाना दो करोड़ रुपये आती है स्पोर्ट्स से फीस
प्रति छात्र 150 रुपये स्पोर्ट्स की फीस ली जाती है। हर साल करीब दो करोड़ रुपये इस मद से आते हैं, जिसमें 50 रुपये विवि को और 100 रुपये कॉलेज को जाता है। बैठक में यह मुद्दा भी खूब गरमाया कि स्पोर्ट्स का पूरा बजट खर्च नहीं होता। बमुश्किल 70 फीसदी पैसा ही खर्च हो पाता है।
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पौने पांच सौ कॉलेज मेडल मिले सिर्फ सात
विवि से संबद्ध करीब पौने पांच सौ कॉलेज हैं, लेकिन खेलों के मामले में खिलाड़ी का स्तर बेहद खराब रहता है। पिछले साल विवि की टीम ने सेपक टाकरा में चार स्वर्ण, दो कांस्य और एक रजत पदक जीता।
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