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शैलेश बन गया अफसाना का बजरंगी भाई जान

Sat, 15 Jul 2017 01:12 AM IST
मोहसिन पाशा, बरेली
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बरेली।
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फिल्म बजरंगी भाई जान की मुन्नी याद होगी...ठीक वैसी ही कहानी है अफसाना की। बिहार की इस युवती का सात साल पहले मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। भाई के साथ इलाज कराने कछौछा पहुंची और वहां वह परिवार से बिछड़ गई। भटकते-भटकते तीन साल पहले बरेली पहुंची और यहां से किसी ने ममता आश्रम में रखवा दिया, तभी से वह वहां थी और धीरे-धीरे ठीक हो गई थी। इधर जिस अफसाना के बिछुड़ जाने पर मां के रोते-रोते आंसू सूख गए। भाइयों ने उसे मरा जानकर चालीसवां तक कर दिया। पति ने तलाक लेकर दूसरी शादी कर ली। उस अफसाना के लिए बरेली के पशुपति विहार में रहने वाले रिसर्च स्कॉलर शैलेश कुमार शर्मा बजरंगी भाई जान बन गए। उन्होंने भागदौड़ कर अफसाना को घरवालों से शुक्रवार को मिला दिया। मिलन का क्षण जिसने देखा आंखें नम हो गईं। अफसाना भाईयों को देखकर दहाड़े मारकर रोने लगी और भाई भी देर तक गले लगाकर आंसू बहाते रहे। अकालतख्त एक्सप्रेस से अब भाइयों के साथ अफसाना घर लौट गई है...उनके लब पर शैलेश के लिए ढेरों दुआएं हैं।
घरवालों से कैसे बिछड़ी अफसाना
बिहार के जिला कैमूर(भभुआ) के मोहरनिया इलाके के बेलौड़ी गांव की अफसाना सात साल पहले कछौछा शरीफ दरगाह इलाज कराने पहुंची थी। अफसाना के भाई शमशेर अंसारी को किसी तांत्रिक ने कछौचा दरगाह पर 40 हाजिरी देने के लिए कहा था। शमशेर किराए का मकान लेकर कछौछा में बहन के साथ रह रहे थे। यहां से किसी दिन वह अचानक घर से निकल गई और बिछ़ड़ गई। तमाम जगहों पर भटकते हुए यहां पहुंची। बीसलपुर रोड पर राज्य दिव्यांग जन कल्याण सशक्तीकरण विभाग की मदद से संचालित ममता आश्रम में 16 सिंतबर 2014 से रहने लगी थी।
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शैलेश ने कैसे मिलवाया
एक सप्ताह पहले शैलेश ने ममता आश्रम में जाकर अफसाना से भोजपुरी में बात की तो उसने अपना पता बता दिया। शैलेश ने अफसाना के पता तस्दीक कराने के लिए मोहरनिया के डीएसपी मनोज राम से संपर्क किया। डीएसपी ने चौकीदार भेजकर अफसाना के गांव के प्रधान से बात करके अफसाना के जिंदा होने की खबर दी तो हैरान रह गए। उन्होंने जैसे ही परिवार वालों को बताया वह डीएसपी के पास पहुंच गए। डीएसपी ने उन्हें शैलेश का पता और फोन नंबर देकर अफसाना के बड़े भाई जुल्फिकार हुसैन अंसारी और शमशेर अंसारी को बरेली भेज दिया। यहां शैलेश ने दोनों को स्टेशन से रिसीव करके होटल में ठहराने के बाद अफसाना के मिलवाकर शुक्रवार को कागजी कार्रवाई कराकर उनकी सुपुर्दगी में दिला दिया।

डोली से उतरने की अफसाना का मानसिक संतुलन बिगड़ गया
बड़े भाई जुल्फिकार हुसैन ने बताया कि 2009 में उन्होंने अफसाना की शादी अपने ही जिले के वरुन गांव के इसरार अली से की थी। शादी के बाद डोली में बैठकर अफसाना जैसे ही ससुराल पहुंची उसने सास को थप्पड़ मार दिया था। घर में उसकी आवाज बेहद बुलंद थी। ससुराल में जाते ही उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने पर पूरा परिवार हैरान था। पति आए दिन उसके साथ मारपीट करता था, इसलिए हम उसे घर ले आए थे।

पति ने तलाक लेकर दूसरी शादी कर ली
कछौछा शरीफ से गायब होने के बाद भाइयों ने अफसाना को तलाश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जुल्फिकार ने बताया कि उन्होंने अफसाना को तलाशने को तीन विशुआ पुस्तैनी जमीन भी बेच दी। एक साल तक अफसाना नहीं मिली तो कोर्ट से पति ने तलाक लेकर दूसरी शादी कर ली।

बेलौड़ी गांव जानता था कि मर गई अफसाना
भाई जुल्फिकार हुसैन ने बताया कि अफसाना के मिलने की हमें कोई उम्मीद नहीं थी। हमने तो उसे मरा जानकर चालीसवां भी कर दिया था। अब गांव के लोगों को अफसाना के जिंदा होने का पता लगा है तो सब हैरान हैं। गांव में शोर है कि सोहराव अंसारी की बेटी जिंदा निकली। अफसाना का हालचाल लेने के लिए भाइयों के पास लगातार फोन आ रहे हैं।
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अफसाना बेहद शांत स्वभाव की है। उसकी मानसिक स्थिति अब ठीक है। वह परिवार के साथ रहने पर बिल्कुल सही हो जाएगी-दुर्गेश जौहरी, ममता आश्रम की प्रभारी

बेहद जुनूनी है यह बजरंगी भाई जान
महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय से एप्लॉइड एंड क्लीनिकल सॉइकोलॉजी में परास्नातक और यहीं से मनोविज्ञान में पीएचडी कर रहे शैलेश की अक्टूबर 2009 की इन्टर्नशिप के दौरान मानसिक चिकित्सालय, बरेली में मानसिक मंदित लोगों से मुलाकात हुई। वहां के मरीजों का दर्द देखकर शैलेश ने ऐसे लोगों की मदद का बीड़ा उठा लिया। शैलेश ने श्रद्धा रिहेबिलीटेशन फाउंडेशन का विजिट अगस्त 2012 में किया और उससे जुड़ गए। उन्होेंने और भी कई लोगों का पता लगाकर उनके परिवार से मिलवाया है।
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