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जमानत प्रार्थना पत्र नहीं पढ़ पाए दरोगा जी, कोर्ट में तलब

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बरेली।
कोर्ट ने थाना जीआरपी जंक्शन से एक आरोपी के आपराधिक इतिहास पर रिपोर्ट मांगी। विवेचनाधिकारी दरोगा ने अभियुक्त की ओर से अंग्रेजी में दिए गए जमानत प्रार्थनापत्र को अपठनीय व अस्पष्ट बताते हुए स्पष्ट पठनीय व हिन्दी भाषा में जमानत प्रार्थनापत्र भिजवाये जाने का निवेदन कर दिया।
अपर सत्र न्यायाधीश सैयद सरवर हुसैन रिजवी ने गंभीरता से लेते हुए इसे न्यायालय के आदेश की अवमानना मानते हुए विवेचनाधिकारी को 16 जून को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कारण बताने को आदेशित किया है कि क्यों न उसके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई अमल में लायी जाए।
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एनडीपीएस एक्ट के तहत मनीष की ओर से सात ग्राम स्मैक बरामदगी के संबंध में 26 मई को जमानत प्रार्थना पत्र दिया गया जिस पर न्यायालय ने संबंधित थाना जीआरपी जंक्शन बरेली से मनीष के आपराधिक इतिहास पर आख्या मांगी। इस पर दरोगा देवेन्द्र गिरि ने एक जून को कोर्ट को जो आख्या भेजी में उसमें कहा गया है कि प्रार्थनापत्र में कोई बिंदु स्पष्ट एवं पठनीय नहीं है। अधिवक्ता द्वारा जमानत प्रार्थना पत्र स्पष्ट पठनीय व हिन्दी भाषा में भिजवाया जाए। एडीजीसी फौजदारी राजपाल यादव ने विवेचनाधिकारी को आख्या के संबंध में संपर्क करने को कहा और सकारात्मक जवाब न मिलने पर उन्होंने 15 जून को न्यायालय को आख्या से अवगत कराया। न्यायाधीश ने प्रार्थनापत्र को पठनीय और स्पष्ट पाते हुए इसे न्यायालय के आदेश की अवमानना माना। उन्होंने आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक रेलवे को भेज कर आवश्यक कार्यवाही किये जाने का निर्देश दिया है।
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