दूध में मिलावट के मामले में 27 वर्षों से चल रहे वाद में एसीजेएम फर्स्ट न्यायालय ने अब फैसला सुनाया है। दोषी को छह माह के कारावास समेत एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। बरेली के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय गोयल ने बताया कि सात जुलाई 1998 को तत्कालीन खाद्य निरीक्षक वीएस सेंगर ने दमखोदा निवासी पोपी से मिश्रित दूध का नमूना लिया था। जांच रिपोर्ट में नमूना असुरक्षित मिलने पर न्यायालय में वाद दायर किया गया था। उसकी सुनवाई चल रही थी। 28 फरवरी को संबंधित वाद की सुनवाई के बाद फैसला हुआ। इसमें छह माह का कारावास और एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग न्यायालय में नियमानुसार वाद दायर कराया गया है। बता दें कि बीते दिनों घी और दूध के नमूने फेल मिलने पर भी दोषी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। उन्होंने बताया कि विचाराधीन 50 वादों में सुनवाई करते हुए एडीएम सिटी ने 16.68 लाख रुपए का अर्थदंड मिलावटखोरी पर लगाया है। कोर्ट में खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत वाद दायर किया था।
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पैक्ड और खुले में बिक रहे पनीर के लिए गए 32-32 नमूने
बरेली। त्योहार पर मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त के निर्देश पर मंगलवार को छापामारी कार्यवाही हुई। सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय अपूर्व श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न ब्रांडों के पैक्ड पनीर के 32 नमूने और डेयरी के पनीर के 32 नमूने लिए गए। साथ ही, कई ब्रांड के 16 सैंपल मिल्क एनालाॅग के लिए गए। इसे जांच के लिए भेजा गया है।