बरेली। जिले की महिलाएं ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में बेहद पीछे हैं। बरेली क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के वर्ष 2021 से 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 5 लाख नॉन-कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं। इनमें केवल 23,500 महिलाओं के नाम पर ही लाइसेंस हैं। जबकि, 2.50 लाख महिलाओं के नाम पर वाहन पंजीकृत हैं।
2.26 लाख से अधिक महिलाओं ने लाइसेंस बनवाने में रुचि नहीं दिखाई है। इसके पीछे का कारण करीब 90 प्रतिशत तक महिलाओं का ड्राइविंग टेस्ट में फेल होना बताया जाता है। जबकि, पुरुषों के नाम पर 4,76,500 लाइसेंस बने हैं। यानी कुल लाइसेंस धारकों में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 4.7 प्रतिशत है।
इसी अवधि में वाहन रजिस्ट्रेशन की बात करें तो जिले में 6 लाख 60 हजार से अधिक दोपहिया और एक लाख से ज्यादा चार पहिया वाहन पंजीकृत किए गए हैं। आरटीओ प्रशासन पंकज सिंह ने बताया कि महिलाएं ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में न केवल कम रुचि दिखा रही हैं, बल्कि जो महिलाएं लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करती हैं, उनमें से करीब 90 प्रतिशत टेस्ट में फेल भी हो जाती हैं। इसके बाद वह दोबारा इसमें रुचि नहीं दिखाती। महिलाओं में जागरूकता की कमी होना भी इसका कारण है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन अब भी महिलाओं की उपस्थिति बेहद सीमित है। संवाद
बिना लाइसेंस पकड़े जाने पर पांच हजार तक का जुर्माना
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बिना लाइसेंस वाहन चलाना न केवल जुर्म है बल्कि गंभीर दुर्घटनाओं की स्थिति में कानूनी और बीमा क्लेम की जटिलता भी बढ़ा देता है। बिना लाइसेंस पकड़े जाने पर 5000 तक का जुर्माना है। दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनी क्लेम देने से इन्कार कर देती है। यदि हादसे में मृत्यु हो जाए तो चालक पर बीएनएस की धारा 106 के तहत मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।