बरेली। बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराने के लिए टास्क फोर्स ने इस वर्ष अप्रैल से नवंबर तक 173 प्रतिष्ठानों से 245 बाल एवं किशोर श्रमिक मुक्त कराए। 79 सेवायोजकों पर मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई में बरेली अव्वल है। सोमवार से शुरू हुए अभियान के पहले दिन दस बच्चे श्रम मुक्त कराए। सेवायोजकों को नोटिस थमाकर जवाब तलब हुआ है।
सहायक श्रमायुक्त बाल गोविंद ने बताया कि विभाग की ओर से बाल एवं किशोर श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम के तहत बच्चों और किशोर श्रमिकों को बालश्रम मुक्त कराने और उनके पुनर्वासन के लिए अभियान चलेगा।
मुहिम 15 दिसंबर तक चलेगी। सेवायोजक, प्रतिष्ठान मालिकों को प्रतिष्ठान और कारखानों में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों या किशोरों से श्रम न कराने की हिदायत दी है।
खतरनाक श्रेणी में दर्ज कार्य में बालश्रम की पुष्टि पर सेवायोजक पर 50 हजार रुपये जुर्माना, छह माह से दो साल तक कैद हो सकती है। सामान्य श्रेणी के कार्य कराने पर 20 हजार रुपये जुर्माना, छह माह की कैद का प्रावधान है। ब्यूरो