बरेली। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण पर प्रतिवर्ष 24 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद एक साल में जिले को एक भी राष्ट्रीय पदक नहीं मिला है। बीते पांच साल में राष्ट्रीय स्पर्धाओं में जिले को सिर्फ एक कांस्य पदक मिला है। वह भी हैंडबॉल में। यह हाल तब है जब 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर आठ खेलों के प्रशिक्षकों की तैनाती है। ये बीपीएड व एनआईओएस (नेशन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स) की डिग्री हासिल किए हुए अनुभवी कोच हैं।
इस समय स्पोर्ट्स स्टेडियम में एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, फुटबॉल, भारोत्तोलन, क्रिकेट, बास्केटबॉल, लॉन टेनिस और जिम्नास्टिक के प्रशिक्षक तैनात हैं। इस लिहाज से प्रतिमाह दो लाख रुपये इनके वेतन पर खर्च हो रहा है। इसके अलावा मैदान की देखरेख, उपकरणों की खरीद और अन्य व्यवस्थाओं पर भी बड़ी राशि खर्च की जाती है। इसके बावजूद खिलाड़ियों की प्रतिभाएं निखर नहीं पा रही हैं।
फुटबॉल में 19 खिलाड़ी, एक साल में कोच को तीन लाख
स्टेडियम में इस समय फुटबॉल का क्रेज अधिक है। इसकी सबसे बड़ी वजह फुटबॉल हॉस्टल हैं। हालांकि हॉस्टल से अलग 19 खिलाड़ी स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनके कोच के तौर पर फुटबॉल हॉस्टल के ही वार्डन आशु भारतीय को अंशकालिक प्रशिक्षकों की भर्ती सूची में शामिल कर दिया गया। उनको हर साल 25 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से हर साल तीन लाख रुपये दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद किसी खिलाड़ी ने कोई उपलब्धि हासिल नहीं की। संवाद
खिलाड़ियों की वर्तमान संख्या
खेल संख्या
एथलेटिक्स 40
क्रिकेट 50
फुटबॉल 19
जिम्नास्टिक 25
भारोत्तोलन 30
लॉन टेनिस 30
बास्केटबॉल 34
वॉलीबॉल 0