तमाम शोध में यह साबित हो चुका है कि शुगर और हाइपरटेंशन के बाद मोटापा गुर्दों (किडनी) का सबसे बड़ा दुश्मन है, इसलिए विशेषज्ञ लगातार इस पर अपडेट हो रहे हैं। रविवार को आईएमए में आयोजित नेफ्रोलॉजी अपडेट में विशेषज्ञों ने गुर्दों से जुड़ी बीमारियों पर तमाम नई जानकारियां दी। फोर्टिस के डॉ. संजीव गुलाटी ने किडनी की बीमारी से जूझ रहे बच्चों की समस्या के प्रबंधन पर प्रकाश डाला। बोले कि, भारत में मोटापा जिस तेजी से बढ़ रहा है यह विश्व में तीसरे नंबर पर है। हमारे यहां 22 फीसदी स्कूली बच्चे मोटापे के शिकार हैं।
डॉ. गुलाटी ने बताया कि मोटापा गुर्दे की बीमारी की शुरूआत है। यह डायरेक्ट किडनी फिल्टर पर हमला करता है। एसजीपीजीआई में जब इस पर गौर किया तो देखा कि यह ढाई गुना तेजी से बढ़ा है। यह एक साइलेंट किलर है जिसके लक्षण देर से आते हैं। पता लगाने के लिए यूरिन यानी पेशाब की जांच जरूरी है। नेफ्रोलॉजिस्ट और कॉर्डियोलॉजिस्ट के अलावा अन्य चिकित्सकों को भी इस जांच पर ध्यान देना चाहिए। अगर बच्चा मोटा है तो साल में एक बार जांच कराएं। नेफ्रोटिक सिंड्रोम से बच्चों के चेहरे पर सूजन आती है और यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है। डॉ. गुलाटी ने बताया कि कनाडा में रहने वाले भारतीयों को किडनी की समस्या सबसे अधिक है। डॉ. सौरभ पोखरियाल ने बताया कि सिर्फ चीनी का अधिक सेवन ही किडनी फेल होने का कारण नहीं है बल्कि एक्सरसाइज न करने से भी इंसुलिन बढ़ता है जिससे आगे चलकर किडनी खराब होती है। इस मौके पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. जेके भाटिया, आयोजन सचिव डॉ. शरद अग्रवाल, डॉ. राजेश कक्कड़, सुनील कथुरिया, संजय बाजपेयी, आलोक कुमार, नसीरुद्दीन, अनूप आर्या व अन्य शामिल रहे।
गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर को न करें नजर अंदाज
एसजीपीजीआई लखनऊ की डॉ. अनुपमा कौल ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है। यह प्रसव के बाद भी बनी रहती है, लेकिन डॉक्टर इस पर ध्यान नहीं देते। जबकि इस समस्या से आगे चलकर महिला की किडनी पर असर पड़ता है। डॉ. कौल ने बताया कि गर्भधारण के 20 सप्ताह के बाद अगर हाईपरटेंशन है तो इसे बिल्कुल भी नजर अंदाज न करें। अक्सर डॉक्टर इसे गर्भावस्था से जुड़ा मानते हैं, जबकि यह गलत है। एसजीपीजीआई में उन्होंने इस पर शोध किया तो 42 फीसदी महिलाएं इससे ग्रसित पाई गईं। देश भर में कितनी महिलाएं गर्भावस्था और इसके बाद हाईपरटेंशन से जूझ रही हैं इसका कोई डाटा नहीं है। जब तक बीमारी का पता चलता है तब तक किडनी के लिए देरी हो चुकी होती है।
एथलीट और बॉडी बिल्डर को जल्दी होता है किडनी रोग
एसजीपीजीआई लखनऊ की डॉ. अनीता सक्सेना ने गुर्दा फेल में पोषण के कारणों पर चर्चा की। वह बोली कि किडनी रोग पांच स्टेज में होता है। पहले स्टेज में रोग हो तो खाने में फर्क लाना पड़ता है और दूसरे स्टेज में नमक की कमी करनी पडती है। अगर खाने में पोटेशियम और प्रोटीन की मात्रा बढ़ गई तो हार्ट में दिक्कत बढ़ सकती है। डॉ. सक्सेना ने बताया कि मैराथन धावक, एथलीट, पुलिस और सेना के जवान खूब दौड़ते हैं। इससे इनके मसल्स टूट जाते हैं और गुर्दे को ब्लॉक करता है। इनको क्रॉनिक किडनी का खतरा कम लेकिन एक्यूट किडनी का खतरा अधिक रहता है। सबसे अधिक प्रोटीन लेने वाले भी किडनी की समस्या से ग्रसित हो सकते हैं। बॉडी के लिए प्रतिकिलो के हिसाब से 2.7 ग्राम प्रोटीन बहुत ज्यादा है।