सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति और निष्कासन में अब कॉलेज खेल नहीं कर पाएंगे। अनुशासनिक कार्रवाई के लिए कॉलेजों को कुलपति से अनुमति लेेनी होगी। निष्कासन या शिक्षक के त्यागपत्र की स्वीकृति भी विश्वविद्यालय की परिनियमावली के अनुसार ही होगी। कॉलेजों को आगाह करते हुए कुलपति ने यह आदेश जारी किया है।
आदेश में कहा गया कि शिक्षकों को निष्कासित करने या त्यागपत्र देने में कॉलेज निर्धारित प्रक्रिया नहीं अपनाते। नियुक्ति में भी काल्पनिक संदर्भ देकर अनुमोदन निरस्त करा लेते हैं। प्रबंधक नियमों का पालन नहीं करते। विश्वविद्यालय पर अनावश्यक कार्रवाई का बोझ बढ़ता है। सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में अब प्रबंधक भी तीन वर्ष या पांच वर्ष की संविदा पर रखे जाएंगे। कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रबंध तंत्र नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा करेगा। शिक्षक तीन माह पहले नोटिस देकर संस्था से त्यागपत्र दे सकता है। प्रबंधन शिक्षक को हटा तो सकता है, लेकिन अनुशासनिक कार्रवाई करने पर कुलपति से अनुमति लेनी होगी। कुलसचिव एके अरविंद ने बताया कि कॉलेजों को आदेश जारी कर दिए हैं। अगर नियमों के विरुद्ध कॉलेज कार्रवाई करते हैं तो विश्वविद्यालय उसे नहीं मानेगा।