फ्लैग- छह करोड़ से ज्यादा का चूना प्राधिकरण को
200 बारातघर बन गए शहर में, तो ‘सोती’ रही छज्जा बढ़ाने पर ‘कूदने’ वाली बीडीए टीम
यानी नक्शा पास न कराने की छूट की मोटी ‘फीस’ डकार गए अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। मकान या दुकान का नक्शा पास कराने के बाद अगर किसी का छज्जा जरा सा आगे निकल जाए तो बीडीए के माली, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर जेई तक तुरंत पहुंच जाते हैं, लेकिन शहर में लगभग 200 बारातघर प्राधिकरण से बिना नक्शा मंजूर कराए अवैध तरीके से बन गए और बीडीए इंजीनियरों की पूरी टीम सोती रही। ये बारातघर एक दिन में तो नहीं बने। लगभग 90 फीसदी बारात घरों के न तो प्राधिकरण से नक्शे पास कराए गए, न ही अन्य विभागों से एनओसी ली गई। यानी अफसर नक्शा पास न कराने की छूट देने की ‘मोटी फीस’ डकार कर चले गए। दो दशक बाद बीडीए अवैध बारात घरों की कंपाउंडिंग कराकर राजस्व वसूलने की तैयारी कर रहा है।
अगर किसी के मकान या व्यावसायिक निर्माण का नक्शा मंजूर हो और वह जरा सा छज्जा आगे बढ़ा ले तो बीडीए की टीम तुरंत मौके पर पहुंच जाती है। जब तक उस भवन मालिक से हिसाब-किताब फाइनल नहीं होता, तब तक वापस नहीं लौटती। शहर में लगभग तीन दशक से बारातघर लगातार बन रहे हैं। कुछ वर्तमान में भी बन रहे हैं। इनमें 90 फीसदी से ज्यादा के नक्शे स्वीकृत नहीं हैं। बीते तीन दशक में जितने भी बारातघर बने, उनमें तमाम बड़े लोगों के हैं, जिनमें पूर्व विधायक, विधायक, कारोबारी या फिर बड़ी पार्टियों के जिलाध्यक्ष या अन्य नेता शामिल हैं। गली-कूचों में भी बिना नक्शा मंजूर कराए अनधिकृत बारातघर धड़ल्ले से चल रहे हैं। न तो बीडीए से इनके मानचित्र मंजूर कराए, न ही सेट बैक या पार्किंग की जगह छोड़ी गई है। इस वजह से शादी बारातों के सीजन में जब यह बारातघर फुल होते हैं तो सड़कों पर जाम लगता है, क्योंकि बारात में शामिल होने वाली लग्जरी गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी होती हैं। बारातघरों ने ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त कर रखा है। बीडीए के इंजीनियर और बड़े अफसर इतने मेहरबान रहे कि बारात घर बनते रहे और वह देखने तक नहीं गए।
इन इलाकों में हैं बारात घर
शहर में सिविल लाइंस, बिहारीपुर, जखीरा, जसोली, कंघी टोला, सैलानी, सूफी टोला, जगतपुर, रोहिली टोला, कांकर टोला, पीलीभीत बाईपास, डोहरा रोड, बीसलपुर रोड, सौ फुटा रोड, डेलापीर, मॉडल टाउन, राजेंद्र नगर, गांधी नगर, डीडीपुरम, कालीबाड़ी, सिकलापुर, आजमनगर, आलमगिरीगंज, बड़ा बाजार, कुतुबखाना, कोहाड़ापीर, बानखाना, शाहाबाद, शाहजहांपुर रोड पर श्यामगंज चौराहे से सेटेलाइट, नकटिया से रजऊ परसपुर, चौपुला से किला, किला से परसाखेड़ा, मिनीबाईपास से कर्मचारी नगर, नर्सरी रोड, सैदपुर हाकिंस, कुदेशिया फाटक, नैनीताल रोड, बदायूं रोड, मढ़ीनाथ, विश्वनाथपुरम, सुभाषनगर, वीर भट्टी, करगैना, करेली, कैंट, लाल फाटक, बुखारा मोड़, आईटीबीपी से आगे रामगंगा पुल तक दो सौ से ज्यादा बारात घर बने हैं।
117 बारातघरों को नोटिस देने की तैयारी
83 नोटिस वालों में आठ ने जमा कराए 28 करोड़
बरेली। बीडीए ने दो सप्ताह पहले अवैध बारातघरों पर शिकंजा कसना शुरू किया। प्रथम चरण में 83 बारातघरों को नोटिस जारी किए गए। इसमें तय किया गया कि अगर बारातघर मालिक 23 मार्च तक नक्शा स्वीकृत या कंपाउंडिंग नहीं कराते है तो एक हजार वर्ग मीटर एरिया वाले बारातघरों पर 2.5 लाख, दो हजार वर्ग मीटर एरिया वालों पर पांच लाख, तीन हजार वर्ग मीटर एरिया वालों पर 7.5 लाख और इससे ऊपर एरिया वाले बारातघरों पर 10 लाख तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
प्रथम चरण में 83 बारातघरों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें से आठ बारातघर मालिकों ने बीडीए दफ्तर जाकर कंपाउंडिंग की प्रक्रिया शुरू करा दी है। इसके लिए इन्होंने बीडीए में 28 लाख की फीस भी जमा कर दी। बाकी बारातघर मालिकों को दो दिन का समय और दिया गया है। उनसे कहा गया है कि वह दो दिन के अंदर कंपाउंडिंग पूरी करा लें। अन्यथा 26 मार्च से अवैध बारात घरों की सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। दूसरी ओर बारातघर एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपेश अग्रवाल के नेतृत्व में बारातघर मालिक मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन लेकर एडीएम (सिटी) ओपी वर्मा से मिले। कहा, शादी बारात का सीजन शुरू होने को है। बीडीए ने अचानक सीलिंग और ध्वस्तीकरण की बात कही है। बारातघर मालिकों को कम से कम तीन माह का समय दिया जाए। अगर बारातघर सील हुए तो जो लोग दो या तीन महीने पहले बुकिंग करा चुके हैं, वे अपनी बारातें कहां ले जाएंगे।
कोट--
प्रथम चरण में 83 बारात घर चिह्नित किए गए थे। उनको नोटिस भेजे गए हैं, वह अपने नक्शे स्वीकृत करा लें या फिर कंपाउंडिंग करा लें। दूसरे चरण में भी अवैध बारात घर मालिकों को नोटिस भेजे जाएंगे। 26 मार्च से सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। - सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव बीडीए