बदायूं। एक व्यक्ति पर फर्जी मुकदमा दिखाकर गैंगस्टर एक्ट लगाने के मामले को स्पेशल जज ने दुरुपयोग मानते हुए सख्ती दिखाई है। इस फर्जीवाड़ा को स्वीकार करने वाले डीएम और एसएसपी पर गंभीर टिप्पणी करते हुए स्पेशल जज ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को पत्र लिखा है।
गैंगस्टर एक्ट दातागंज के गांव धीमरपुरा निवासी नन्हे पर लगाया गया था। इसका अनुमोदन एसएसपी की रिपोर्ट पर डीएम ने दिया था। नन्हे के खिलाफ मात्र एक केस हत्या का था, लेकिन पुलिस ने दूसरा मामला गैर इरादतन हत्या का दर्शाकर उस पर 31 अक्तूबर 2018 को गैंगस्टर की कार्यवाही कर दी थी। नन्हे ने अपने वकील के जरिए स्पेशल जज (गैंगस्टर एक्ट) देवराज प्रसाद सिंह के यहां जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया। इसमें नन्हे की ओर से कहा गया कि उस पर मात्र हत्या का ही एक केस है, जबकि गैंग चार्ट में उस पर दो केस दिखाए गए हैं।
कोर्ट ने थाने से जब इसकी रिपोर्ट तलब की तो बात सही निकली। इस पर 11 मार्च को कोर्ट ने डीएम और एसएसपी को नोटिस देकर जवाब तलब किया था। सोमवार को दाखिल किए गए अपने जवाब में डीएम ने गलती को स्वीकार भी कर लिया। इससे पहले एसएसपी ने 15 मार्च को दिए अपने स्पष्टीकरण में गलती होना स्वीकार किया था। वहीं दोनों अफसरों ने इस मामले में दोषी पुलिस अधिकारी को दंडित नहीं किया और न ही अदालत को कार्रवाई से अवगत कराया।
कोर्ट ने कहा-डीएम और एसएसपी के कृत्य से छवि हुई धूमिल
बदायूं। दातागंज के नन्हे के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट की फर्जी कार्यवाही के मामले में शासन को पत्र लिखने वाले स्पेशल जज ने डीएम और एसएसपी पर गंभीर टिप्पणी की है। स्पेशल जज ने प्रमुख सचिव और डीजीपी को लिखे पत्र में कहा है कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में राज्य सरकार ने नीति निर्धारित कर रखी है, मगर इन दोनों अधिकारियों ने इसके विरुद्ध कार्य किया है।
आगे कहा-ऐसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच होना आवश्यक है। चूंकि शासनादेश का जानबूझकर अतिक्रमण या उल्लंघन किया गया, मगर दोनों ही परिस्थितियों में इन दोनों अधिकारियों का यह कृत्य स्वीकार करने योग्य नहीं है। दोनों अधिकारियों ने संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात का स्पष्टीकरण देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली, मगर किसी पर कार्रवाई के बारे में न्यायालय को कभी अवगत नहीं कराया है। इन दोनों अधिकारियों के कृत्य से समाज में न्याय प्रशासन और राज्य प्रशासन की छवि धूमिल होती है। गैंगस्टर एक्ट का दुरुपयोग रोकना आवश्यक है।