बरेली। कड़े निर्देश के बावजूद कॉलेज परीक्षाओं में गड़बड़ी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। मंगलवार को कुलपति ने टीम के साथ दस से ज्यादा परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। महादेव राम स्वरूप मेमोरियल महाविद्यालय में कई अव्यवस्थाएं मिलीं, जिसे देख कुलपति भड़क गए। केंद्राध्यक्ष की जमकर फटकार लगाई। परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका पर कुलपति ने पूर्व में हुई परीक्षाओं के सीसीटीवी की रिकार्डिंग की सीडी मांगी है। कई जगह सीसीटीवी कैमरे ठीक नहीं मिले।
कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल टीम के साथ सबसे पहले पीलीभीत रोड स्थित श्याम निहाल डिग्री कॉलेज पहुंचे। यहां स्ट्रांग रूम में कैमरे नहीं लगे थे। तुरंत कैमरे लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद उड़ाका दल मिलक स्थित राम बहादुर सिंह मेमोरियल डिग्री कॉलेज पहुंचा। हालांकि यहां व्यवस्थाएं ठीक थी। महादेव रामस्वरूप मेमोरियल महाविद्यालय टांडा में कुलपति ने प्रथम पाली की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग देखी। इसमें गड़बड़ी मिली। फुटेज में कई छात्र बार-बार कक्ष में टहलते नजर आए। इससे गड़बड़ी की आशंका हुई। कुलपति ने केंद्राध्यक्ष को फटकार लगाई और पूर्व की परीक्षाओं की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की सीडी मांगी। भविष्य में ऐसी लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। सावित्री देवी महाविद्यालय टांडा रोड रामपुर में कुलपति ने बीएससी गणित के एक छात्र को नकल करते पकड़ा। उसके पास गेस पेपर की पर्चियां थीं।
सख्ती हुई तो पकड़े गए 36 नकलची
बरेली। मंगलवार को बीएससी गणित और बॉटनी जैसे प्रमुख विषयों की परीक्षा थी। इसको लेकर सख्ती बरतने के निर्देश दिए थे जिसका असर भी दिखा। मंगलवार को 36 नकलची पकड़े गए, जिसमें 20 छात्र और 16 छात्राएं थी। अधिकतर के पास से गेस पेपर की पर्चियां बरामद हुईं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि एंट्री के दौरान परीक्षार्थियों की तलाशी ठीक से नहीं ली जा रही। वहीं बरेली कॉलेज में सुबह की पाली में बीएससी गणित का एक छात्र और बीएससी की एक छात्रा नकल सामग्री के साथ पकड़े गए। मंगलवार को तीनों पालियों में 107658 विद्यार्थी पंजीकृत थे। जिसमें 55667 छात्र और 51991 छात्राएं थी। इसमें 942 छात्र और 3335 छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी।
ज्यादातर राजकीय कॉलेजों में कैमरे नहीं
ज्यादातर राजकीय कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे विश्वविद्यालय के कंट्रोलरूम से कनेक्ट नहीं है। जब कॉलेजों में फोन किया गया तो पता चला कि कॉलेजों ने कैमरे लगाए ही नहीं। उनका तर्क था कि बजट न होने के कारण सीसीटीवी कैमरे नहीं लगा पाए।