टुल्ला : जीएसटी पर उलझन
2000 से ज्यादा मकानों की खरीद-फरोख्त पर लगा ब्रेक
केंद्र सरकार की घोषणा के बाद ‘कारपेट एरिया’ पर उलझे कॉलोनाइजर, ग्राहकों ने भी खींचे कदम
एक अप्रैल से लागू की जाएंगी जीएसटी की नई दरें, 24 फरवरी को हुई थी घोषणा
केंद्र सरकार ने मकानों पर 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी है जीएसटी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। केंद्र सरकार ने जीएसटी दर 8 और 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी करने का निर्णय लिया है। वहीं, 90 वर्ग मीटर कारपेट एरिया और 45 लाख रुपये तक के मकानों, जो अफोर्डेबल की श्रेणी में आते हैं, उन पर जीएसटी की दर एक फीसदी रहेगी। मगर यह निर्णय एक अप्रैल से प्रभावी होगा। इसका लाभ पाने के इंतजार में ग्राहकों ने मकानों की खरीदारी बंद कर दी है, जिसके चलते हाउसिंग प्रोजेक्ट ठहर गए हैं। यह प्रोजेक्ट वे हैं जो, बीडीए अप्रूव्ड हैं। अब सभी को एक अप्रैल का इंतजार है। हालांकि इसके बावजूद ‘कारपेट एरिया’ की परिभाषा को लेकर असमंजस बना हुआ है। रियल एस्टेट सेक्टर में तीन तरह का ‘कारपेट एरिया’ प्रचलन में है लेकिन नए आदेश में यह साफ नहीं किया गया है कि नई दरें किस कारपेट एरिया पर लागू होंगी। बिल्डर इससे उलझन में हैं।
सभी को घर उपलब्ध कराने की मंशा के तहत केंद्र सरकार ने 24 फरवरी को नए मकानों के लिए जीएसटी दरें पांच फीसदी कर दी हैं जो एक अप्रैल से लागू होंगी। अब तक कालोनाइजर्स को 12 फीसदी जीएसटी देनी पड़ती थी। क्रेडाई अध्यक्ष रमनदीप सिंह के मुताबिक यह फैसला, आम जनता और कालोनाइजर, सभी के हित में है। इसके अलावा अफोर्डेबल मकान (90 वर्ग मीटर कारपेट एरिया और 45 लाख रुपये कीमत) के लिए अब जीएसटी की दर एक प्रतिशत कर दी गई है। बरेली शहर में बिकने वाले अधिकांश मकान इसी श्रेणी में आते हैं। जीएसटी की दरों में कमी का लाभ पाने के लिए अब खरीदार एक अप्रैल का इंतजार कर रहे हैं। इसके चलते ही हाउसिंग प्रोजेक्ट का काम ठंडा पड़ा हुआ है।
कारपेट एरिया में उलझे बिल्डर
रियल एस्टेट सेक्टर में कारपेट एरिया की तीन परिभाषा प्रचलन में हैं। बिल्डर जयदीप लुनियाल बताते हैं कि बीआईएस के अनुसार कारपेट एरिया में किचन, बाथरूम, सीढ़ी और दीवारें नहीं आएंगी। रेरा का कहना है कि कारपेट एरिया में सिर्फ मकान की बाहरी दीवार नहीं आएगी और रियल एस्टेट सेक्टर में काम करने वाले कहते हैं कि मकान की दीवारें कारपेट एरिया में नहीं आएंगी। अब, बिल्डर इस पशोपेश में हैं कि 90 मीटर कारपेट एरिया का जो नियम है, उस पर इनमें से कौन सी परिभाषा लागू होगी? जब तक स्पष्ट नहीं हो जाता, काम करना मुश्किल है।
पुराने प्रोजेक्ट पर दी जा चुकी है जीएसटी
क्रेडाई सचिव सुनील गुप्ता के अनुसार आवास निर्माण के शहर में जो पुराने प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उन पर जीएसटी 12 फीसदी की दर से दी जा चुकी है। उनको नहीं लगता है कि सरकार प्राइवेट कालोनाइजर्स से 7.0 फीसदी ज्यादा वसूली गई जीएसटी वापस करेगी। वर्तमान में शहर में लगभग 10 हजार मकानों के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। अगर इन पर जीएसटी दर कम होती है तो खरीदारों को ज्यादा फायदा होगा।
सामान की खरीदारी पर भी उलझन
सरकार ने एक नई शर्त यह भी लगाई है कि हाउसिंग प्रोजेक्ट लाने वाले बिल्डर को निर्माण सामग्री की 80 प्रतिशत खरीदारी जीएसटी में रजिस्टर्ड वेंडर से ही करनी होगी। बिल्डर इसे एक मुश्किल निर्णय मान रहे हैं, क्योंकि हाउसिंग प्रोजेक्ट में सरिया बांधने, मिट्टी डलवाने जैसे तमाम छोटे-छोटे कामों के लिए रजिस्टर्ड वेंडर मिलना बहुत ही मुश्किल है।
एक अप्रैल के इंतजार में करीब 2000 आवास
बिल्डर्स के मुताबिक शहर में इस समय बीडीए अप्रूव्ड करीब दर्जन भर प्रोजेक्ट के 2000 आवास एक अप्रैल के इंतजार में हैं। कारपेट एरिया की परिभाषा तय होने के बाद बिल्डर्स को उम्मीद है कि यह मकान आने वाले छह महीने में बिक जाएंगे, जो रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ा बूम होगा।