बरेली। ध्वस्तीकरण का आदेश होने के बावजूद कथित बाबा ने जमींदारी के नाम पर ईसाईयों की पुलिया पर कई दुकानें बनाकर तैयार कर ली हैं। दिवाली पर जब अफसर छुट्टियां मना रहे थे तब बाबा ने इस जगह में कई कमरे भी बना लिए। अब इनमें फर्श और प्लास्टर का काम किया जा रहा है। मगर प्रशासन एवं बीडीए के अफसरों का ध्यान इस ओर नहीं है।
ईसाईयों की पुलिया पर सड़क किनारे मंदिर की आड़ में करीब आधा दर्जन दुकानों का निर्माण किया गया था। इससे पूर्व 15 जुलाई, 2015 को बीडीए ने इन दुकानों को सील भी किया था। इसके बाद 26 अक्तूबर, 2015 को इनके ध्वस्तीकरण का आदेश किया गया तो बाबा बृहस्पति गिरि ने बीडीए के अध्यक्ष एवं कमिश्नर की अदालत में अपील कर दी। बृहस्पति गिरि ने अपील में मानचित्र पत्रावली 15 दिन में तैयार कराने की बात कही, लेकिन कमिश्नर ने अपील खारिज कर दी। इसके बावजूद बीडीए ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि बृहस्पति गिरि ने इसमें राहत पाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है लेकिन अब तक उसकी लिस्टिंग नहीं हुई है।
चार नए कमरे बना लिए, अब भी निर्माण जारी
दिवाली पर जब अफसर छुट्टियों में व्यस्त थे तो मंदिर की देखरेख करने वालों ने पीछे की ओर चार नए कमरे बना लिए। अब इनमें फर्श-प्लास्टर का काम किया जा रहा है। इसके अलावा छत पर भी बाउंड्रीवॉल करा दी गई है।
हमारी जमींदारी है, प्रशासन हटाने वाला कौन
सड़क किनारे की जमीन पर अवैध निर्माण के मामले में बृहस्पति गिरि का कहना है कि यह जमीन कस्बा हाफिजपुर का हिस्सा है और यहां अब तक उनकी जमींदारी चली आ रही है। यहां की जमींदारी खत्म नहीं हुई। जहां निर्माण किया है, वह खसरा नंबर 237 है और इसमें से ही नेशनल हाईवे निकालने को जमीन दी गई है। बाकी जमीन पर मंदिर बना हुआ है। प्रशासन हमें यहां से हटाने वाला कौन होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए डीएम और एसएसपी को अधिकृत किया है। इस संबंध में काफी पहले शासनादेश भी जारी हो चुका है। अगर पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई कदम उठाया जाएगा तो बीडीए भी नियमों का पालन कराने में पीछे नहीं हटेगा। - डॉ. सुरेंद्र कुमार पांडेय, वीसी बीडीए