अब तक किसानों को सरकार से सब्सिडी पर दिए जाने वाले कृषि यंत्रों की खरीद में घपला करके हर साल लाखों रुपये हड़पने वाले कृषि विभाग के अफसर और कर्मचारियों को नए आदेश से तगड़ा झटका लगा है। बरेली समेत छह मंडलों में प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन फॉर इन सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू योजना के तहत अब पोर्टल पर पंजीकृत किसान सब्सिडी पर मिलने वाले कृषि यंत्र किसी भी इनपैनल्ड निर्माण कंपनियों के अधिकृत विक्रेताओं से खरीद सकेंगे। दो कृषि यंत्र खरीदने पर 50 प्रतिशत और तीन कृषि यंत्र खरीदने पर किसानों को सरकार 80 प्रतिशत सब्सिडी देगी। यंत्र खरीदने के बाद उनका बिल उप निदेशक कार्यालय में जमा करना पड़ेगा।
उप कृषि निदेशक 10 रुपये के स्टांप पर किसान से एक अंडरटेकिंग लिखवाकर लेंगे। इसमें कृषि यंत्र और संबंधित कंपनी का विवरण होगा। स्टांप पर किसान से यह भी लिखवाया जाएगा कि अगर सत्यापन में कृषि यंत्र खरीद असत्य पाई गई तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी जाए। उसे कोई आपत्ति नहीं होगी। किसान द्वारा कृषि यंत्र बिल देने के 24 घंटे के अंदर उप निदेशक को पोर्टल पर उसे अपलोड करना होगा। जो किसान पहले से पंजीकृत नहीं है, उनका पंजीकरण तत्काल कराने की जिम्मेदारी उप कृषि निदेशक की होगी। इसके बाद उप कृषि निदेशक किसान के अभिलेख अपलोड कर तत्काल नियमानुसार बिल बनाकर संयुक्त कृषि निदेशक की लॉग इन आईडी पर अनुदान राशि किसान के खाते में हस्तांतरित करने के लिए भेजेंगे। बिल अपलोड करने के एक महीने के अंदर यंत्रों का भौतिक सत्यापन पूरा किया जाएगा। कृषि यंत्रों के खरीद की व्यवस्था 30 अक्तूबर तक ही मान्य होगी।