समायोजन रद्द होने से नाराज शिक्षामित्रों की भीड़ बुधवार को उग्र हो गई। उन्होंने स्कूल नहीं खोले और प्रदर्शन करने शहर में इकट्ठा हो गए। गांधी उद्यान में सभा करने के बाद सड़क पर लेट गए और नेशनल हाइवे जाम करने की कोशिश की। राहगीर से मारपीट भी की। उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठी फटकारनी पड़ी। सूचना पाकर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट यूपी सिंह ने शिक्षामित्रों को समझाकर शांत कराया और ज्ञापन लिया है। शिक्षामित्राें ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा है कि या तो उन्हें शिक्षकों के समान सुविधाएं दी जाएं या फिर इच्छा मृत्यु दें। बृहस्पतिवार को शिक्षामित्र फिर प्रदर्शन के लिए जमा होंगे।
बुधवार को तीन संगठनाें के नेतृत्व में शिक्षामित्रों ने गांधी उद्यान में जमा होकर करीब दो घंटे तक सभा की। इसके बाद नेशनल हाइवे पर जाम लगाने की कोशिश की। इस दौरान वहां से निकल रहे एक राहगीर के साथ बहस हो गई। बौखलाए शिक्षामित्रों ने राहगीर से मारपीट की और बाइक में भी तोड़फोड़ की। सूचना पाकर मौके पर कई थानों की पुलिस पहुंच गई और गांधी उद्यान को घेर लिया। फोर्स ने जाम खुलवाने की कोशिश की तो शिक्षामित्र सड़क पर लेट गए। पुलिस को लाठी फटकारनी पड़ी। सिटी मजिस्ट्रेट ने पहुंचकर सभी को शांत कराया और ज्ञापन लिया। संयुक्त सक्रिय शिक्षक शिक्षामित्र समिति के प्रदेश संरक्षक दुष्यंत चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री से उनकी मांग शिक्षकाें के समान सुविधा देने की है या फिर इच्छा मृत्यु दें। इस दौरान मौजूद सोमेंद्र गुर्जर, रविंद्र कश्यप, सूरज मौर्य, रोहित यादव, वीर सिंह यादव और महेंद्र लोधी ने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है।
मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे कुछ शिक्षामित्र
उत्तर प्रदेश समायोजित शिक्षामित्र शिक्षक संघ के लोग पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां गेट के सामने वह धरना देकर बैठ गए। सुरक्षाकर्मियों ने कलेक्ट्रेट गेट बंद कर दिया। सिटी मजिस्ट्रेट ने शिक्षामित्राें का ज्ञापन लिया। जिलाध्यक्ष केपी सिंह, प्रवेश पटेल, कपिल यादव, विनीत चौबे, शिशुपाल, विजय चौहान व अन्य ने कहा कि शिक्षामित्रों की ओर से सरकार को पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए।
कैसे चुकाएंगे कर्ज, कैसे होगी शादी
शिक्षामित्र बनने पर वेतन 3500 रुपये था, लेकिन सहायक अध्यापक बनने के बाद इनका वेतन एचआरए के साथ 48 हजार 553 और नान एचआरए में 46 हजार 543 रुपये तक पहुंच गया था। इससे शिक्षामित्रों की लाइफ स्टाइल बदल गई। कुछ ने घर बनाने के लिए कर्ज लिया तो कुछ ने चार पहिया वाहन फाइनेंस कराया। अब अर्श से फर्श पर आने के चलते सभी की चिंता बढ़ गई है। कुंवर सिंह गंगवार भदपुरा ब्लॉक में तैनात थे। वह बोले, इस उम्र में अब वह कौन सी नौकरी करेंगे। जब यही करना था तो शिक्षक पद पर समायोजित करके अच्छी जिंदगी के सपने क्यों दिखाए। आलमपुर जाफराबाद में सोमेंद्र गुर्जर और उनका भाई रामशंकर भी शिक्षक पद पर समायोजित हुए। नौकरी के भरोसे ही आठ लाख का बैंक लोन लेकर शहर में अच्छा मकान बनाया। सुशपाल की शादी इसी नौकरी के चलते फिक्स हुई थी।
254 शिक्षामित्रों को मिल रहा था 3500 मानदेय
जिले में 3400 शिक्षामित्र थे। इसमें एक हजार से अधिक शिक्षामित्र शिक्षक व अन्य पदों पर चुन लिए गए थे। शेष करीब 3200 शिक्षामित्रों में 254 को छोड़कर बाकी को सहायक अध्यापक पद पर समायोजन मिल गया था। 254 शिक्षामित्राें को सरकार की ओर से 10 हजार मानेदय दिया जाना था जो अभी तक आया ही नहीं है। ये सभी 3500 मानदेय पर ही नौकरी कर रहे थे। इन्हें झटका कम लगा है।
स्कूलों को चलाना हुआ मुश्किल
जिले के 2100 प्राथमिक विद्यालयाें में तीन हजार से अधिक शिक्षामित्र तैनात हैं। इनमें करीब 40 फीसदी स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं। किसी में चार तो किसी में सात शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बनकर तैनात थे। इनके विरोध के चलते स्कूल खुलना मुश्किल हो गए। बुधवार को बीएसए मझगवां, शेरगढ़, बहेड़ी और मीरगंज के स्कूलों के लिए शिक्षकों का इंतजाम करती रहीं। सुबह से ही फोन आ रहे थे, कि स्कूल नहीं खुले। आसपास से शिक्षकों को भेजकर स्कूल खुलवाया गया, लेकिन पढ़ाई नहीं हो पाई।
शिक्षामित्रों के मामले पर अब शासन स्तर पर जो पॉलिसी बनेगी और जो निर्देश होंगे वही किया जाएगा। फिलहाल शिक्षामित्रों के स्कूलों में न पहुंचने से परेशानी खड़ी हो गई है। आसपास के शिक्षकाें को भेजकर व्यवस्था बनाई जा रही है। - चंदना राम इकबाल यादव, बीएसए