बरेली। चुनावी इतिहास बताता है कि समाजवादी पार्टी की ओर से अब तक बरेली में ऐसा कोई प्रत्याशी पेश नहीं किया गया जो भाजपा को कड़ी टक्कर दे पाया हो। सपा से अक्सर ऐसे प्रत्याशी जरूर आए जिन्होंने वोटों का ध्रुवीकरण कराकर भाजपा की जीत को और आसान कर दिया। ऐसे में कई बार सपा पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को सजी-सजाई थाली पेश कर देने जैसे आरोप भी लगे, लेकिन इस बार सपा हाईकमान बरेली में भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। पार्टी में अंदरखाने चर्चा है कि इसके लिए वरिष्ठ नेता नया प्रयोग भी कर सकते हैं। पुराने दावेदारों को दरकिनार कर बरेली में बाहरी प्रत्याशी लाया जा सकता है, वह भी सवर्ण ताकि सपा और बसपा का परंपरागत वोटबैंक सहेजने के साथ भाजपा के वोटबैंक में भी सेंध लगाई जा सके।
सपा-बसपा गठबंधन के बाद बरेली की सीट सपा और आंवला की बसपा के हिस्से में आई है। पीलीभीत की सीट भी सपा के खाते में है। अब तक सपा ने बरेली और पीलीभीत दोनों ही सीटों पर अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। बरेली लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक पांच प्रत्याशियों ने टिकट की दावेदारी की है। मगर इनमें एक या दो प्रत्याशियों को ही चुनाव लड़ने के लिए गंभीर माना जा रहा था। मगर बसपा से गठबंधन के बाद पार्टी हाईकमान नए पैंतरे तय करने पर भी विचार कर रही है। खासकर पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक का असर जिस तरह देश भर के राजनीतिक माहौल पर पड़ता दिख रहा है, उसे देखते हुए पार्टी का मानना है कि बगैर किसी ठोस रणनीति के भाजपा को चुनौती देना आसान नहीं होगा। इसी के चलते बरेली के लिए भी अलग रणनीति बनाकर भाजपा के लिए कड़ी चुनौती पेश करने की तैयारी है।
सूत्रों की मानें तो सपा दलित, पिछड़ा, मुस्लिम समीकरण के मजबूत जातीय समीकरण के बल पर किसी बाहरी प्रत्याशी पर दांव लगाने का मन बना रही चुकी ै। अब तक सपा ने बरेली लोकसभा सीट पर ज्यादातर प्रत्याशी मुस्लिम वर्ग से उतारे हैं। मगर मुस्लिम प्रत्याशी उतरते ही लोकसभा चुनाव में मतदाताओं का ध्रुवीकरण हो जाता है और भाजपा आसानी से यह सीट हथिया लेती है। ऐसी रिपोर्ट हाईकमान को मिलने के बाद सपा नेतृत्व इस बार गठबंधन से लोकसभा का प्रत्याशी अल्पसंख्यक के बजाय हिंदुओं में सवर्ण वर्ग से उतारने का गणित लगाया है। पार्टी हाईकमान का मानना है कि अब तक अल्पसंख्यक वर्ग से प्रत्याशी उतारने का फायदा हमेशा भाजपा को मिलता रहा है। इस बार बसपा से गठबंधन होने के बाद सपा को मुस्लिम वोट मिलने का पूरा भरोसा है। ऐसे में पार्टी भाजपा को आसानी से थाली में सजाकर सीट परोसने की छवि से बचने की जोड़तोड़ में लगी है।
इतिहास गवाह..
1989 से 2014 तक भाजपा और सपा के प्रत्याशी
वर्ष भाजपा प्रत्याशी सपा प्रत्याशी कांग्रेस प्रत्याशी जीत
1989 संतोष गंगवार जयदीप सिंह बरार (जनता दल) बेगम आबिदा अहमद भाजपा
1991 संतोष गंगवार ज्वाला प्रसाद गंगवार (सजपा) अकबर अहमद डंपी भाजपा
1996 संतोष गंगवार छोटेलाल गंगवार (सपा) इस्लाम साबिर भाजपा
1997 संतोष गंगवार इस्लाम साबिर (सपा) --- भाजपा
1999 संतोष गंगवार इस्लाम साबिर (सपा) --- भाजपा
2004 संतोष गंगवार इस्लाम साबिर (सपा) --- भाजपा
2009 संतोष गंगवार इस्लाम साबिर (सपा) -- - कांग्रेस
2014 संतोष गंगवार आयशा इस्लाम (सपा) प्रवीण सिंह ऐरन भाजपा
बरेली लोकसभा सीट पर सपा ने हमेशा मजबूत चुनौती पेश की है। इस बार हम ऐसा प्रत्याशी उतारने जा रहे हैं तो भाजपा प्रत्याशी को भारी वोटों के अंतर से हराएगा। - शुभलेश यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष सपा
इस बार लोकसभा चुनाव का गणित सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में है। गठबंधन का बरेली में जो भी प्रत्याशी होगा, उसे 50 प्रतिशत से ऊपर वोट मिलेंगे। गठबंधन का प्रत्याशी ही सांसद बनकर लोकसभा में जाएगा। - भगवतसरन गंगवार, पूर्व मंत्री