बरेली। अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं केवल गांव में केवल छोटे-मोटे व्यवसाय तक सीमित नहीं रहेंगी। सरकार र्स्टाटअप इंडिया योजना में उनको स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दिलाकर अत्याधुनिक रोजगार से भी जोड़ेगी। समूहों में केवल महिलाएं ही नहीं रहेंगी बल्कि इनमें दिव्यांग, बुजुर्ग समेत गांव के अन्य गरीब तबके के लोगों को शामिल कर रोजगार से जोड़ा जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) योजना केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 से प्रारंभ की है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं। हाल ही में सीडीओ की पहल पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में बच्चों की ड्रेस बनाकर वितरित करने का काम दिलाया गया था। कई जगह स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कैंटीन भी चला रही हैं। कुछ समूहों के जमीनी स्तर पर बेहतर काम करने की नीति से प्रभावित होकर सरकार ने बिथरी और भोजपुरा ब्लाकों में समूह गठन का लक्ष्य बढ़ा दिया है। अब दोनों ब्लाकों में आने वाले साल में 486 स्वयं समूह सहायता बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन समूहों में महिलाओं के साथ दिव्यांगों, बुजुर्गो, रिटायर्ड कर्मचारी भी शामिल किए जाएंगे। इनको विशेष ट्रेनिंग दिलाकर र्स्टाटअप फंड भी दिलाया जाएगा, ताकि ग्रामीण बेरोजगारों की आमदनी बढ़ाई जा सके।
एनआरएलएम में बरेली को शासन ने विशेष वरीयता दी है। अब यहां स्वयं सहायता समूहों को र्स्टाटअप योजना से जोड़ा जाएगा। इसके लिए अलग से सेल का भी गठन किया गया है। वही सेल पूरी योजना की मानीटरिंग करेगा। सत्येंद्र कुमार, सीडीओ