बरेली। यूं तो अपनी बरेली में अब भंडारे के दौरान गंदगी फैलाने जैसे मामलों में मंदिर के बाबा का चालान करने जैसी भी मिसाल हैं, लेकिन फिर भी स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में एक बार फिर बरेली सम्मानजनक रैंक हासिल नहीं कर सका। बुधवार को जारी हुई रैंकिंग में बरेली ने पिछले साल के मुकाबले 108 अंकों की छलांग तो लगाई लेकिन टॉप 100 में आने का लक्ष्य पूरा नहीं कर सका। उसे इस बार 117वीं रैंक हासिल हुई है। मंदिर के बाबाओं के साथ अगर शहर में सफाई कराने का दारोमदार संभालने वाले नगर निगम के बाबुओं को भी कसा जाता तो शायद हालात और बेहतर होते।
हालांकि स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में बरेली प्रदेश में नौवें पायदान पर रहा जो सूबे की राजधानी लखनऊ और पड़ोसी नगर निगम मुरादाबाद से ऊपर है। इस सर्वे में देश भर के 4237 शहरों ने भाग लिया था। बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश भर के 4237 शहरों में सफाई का सर्वेक्षण कराया गया था। भारत सरकार की टीम ने बरेली में तीन दिन तक सफाई व्यवस्था देखी और कई अन्य बिंदुओं पर जायजा लिया था। बुधवार को इसकी रैकिंग जारी की गई। यूपी के टॉप में नगर निगम के आने पर निगम अफसर खुश हैं, लेकिन टॉप 100 में आने के लक्ष्य से चूकने पर मायूस भी है। 4000 अंकों के इस सर्वे में बरेली को 2270.86 अंक मिले हैं।
पिछले सालों से बेहतर प्रदर्शन
देश में स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 से शुरू हुआ। 2017 के सर्वे में बरेली को 298 रैंक मिली थी। इसके बाद 2018 के सर्वे में बरेली और पिछड़कर 325 पर जाकर ठहर गया था, लेकिन इस बार लंबी छलांग लगाकर 117वीं रैंक पर पहुंच गया। वर्ष 2018 के सर्वे में मुरादाबाद, अलीगढ़, शाहजहांपुर आदि शहर बरेली से आगे थे। इस बार अलीगढ़ को 145, शाहजहांपुर को 162, मुरादाबाद को 195, बदायूं को 345, रामपुर को 351 और पीलीभीत को 362 रैंक मिली है।
इन बिंदुओं पर पिछड़े
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट,
- गीला-सूखा कूड़ा का अलग कलेक्शन
- पब्लिक फीडबैक और जागरूकता की कमी
सफाई को लेकर नगर निगम ने काफी काम किया है। इसके चलते ही स्वच्छता सर्वेक्षण में बरेली को 117वीं रैंक हासिल हुई है। सर्वे में साबित हुआ है कि बरेली शहर लखनऊ से भी साफ है। अभी हम इसे और ज्यादा बेहतर करेंगे। - उमेश गौतम, मेयर
सर्वे अपनी जगह मगर जमीनी स्तर पर काफी कामबाकी
बरेली। स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछले साल की तुलना में बरेली ने भले ही छलांग लगाई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर काफी काम करना बाकी है। बुधवार को रैंकिंग जारी होने के बाद अमर उजाला ने शहर में सफाई व्यवस्था का जायजा लिया तो सर्वे के नतीजे बेमानी नजर आए। शौचालय बनने के बाद भी ओडीएफ के दावे खोखले निकले। कूड़ा कलेक्शन भी बेहतर नहीं दिखा। शहर में कई इलाकों में अभी भी स्वच्छता की काफी कमी है।
मिनी बाईपास : अवैध डलावघर निगल रहा सड़क
वार्ड सैदपुर हाकिंस में मिनी बाईपास पर दिवाकर अस्पताल के पास सड़क किनारे ही अवैध डलावघर बना है। यहां से कूड़ा नियमित नहीं उठता है और कूड़े वाले वाहनों के आवागमन से सड़क भी क्षतिग्रस्त होने लगी है।
सिविल लाइंस : सड़क किनारे भी कूड़े के ढेर
शहर के सबसे वीआईपी इलाके सिविल लाइंस में भी बुधवार को सफाई का हाल बहुत अच्छा नजर नहीं आया। रतनदीप कॉम्प्लेक्स के पास और स्टेशन रोड पर जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े नजर आए।
चक महमूद : कच्ची गलियाें में कीचड़ और कूड़ा
पुराना शहर का मोहल्ला चक महमूद, गंदगी और बदहाली ही इसकी पहचान बन गई है। अख्तर की डेयरी पास गली कच्ची होने से कीचड़ हो गई है। पुराना कब्रिस्तान के पास फखरुद्दीन स्कूल के पीछे, कादरी और चांद मस्जिद के पास भी कूड़े के ढेर मिले।
बानखाना : नाला भी कूड़े से पाट दिया
सुर्खा बानखना में क्षेत्र के प्रमुख नाले को ही लोगों ने कूड़ाघर बनाकर पाट दिया है। इसके चलते वहां जलनिकासी अवरुद्ध होने लगी है और आसपास की गलियों का पानी उसमें जाने में दिक्कत हो रही है।
शौचालय बने पर शुरू नहीं हुए
नगर निगम में ओडीएफ के दावे भी बेमानी नजर आ रहे हैं। नगर निगम के सामने ही महिलाओं के लिए पिंक टायलेट बनाया गया है, लेकिन इसे शुरू नहीं किया जा सका। इसी तरह हजियापुर का टायलेट भी बदहाल होने के चलते बंद पड़ा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम क्षेत्र के लाभार्थियों को शौचालय की पूरी रकम भी अब तक नहीं मिली है, जिसके चलते शौचालय अधूरे पड़े हैं।