बरेली। अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य के आवास एवं नियोजन मंत्रालय ने प्राधिकरणों को फिर से रिमाइंडर जारी किया है। उसमें कहा गया है कि केवल उन मकानों की ही रजिस्ट्री की जाए, जिनके नक्शे प्राधिकरणों से मंजूर हों। जिन मकानों के मानचित्र या कॉलोनियों के लेआउट प्राधिकरण से मंजूर नहीं हैं, उनकी रजिस्ट्री पर रोक लगा दें।
यह शासनादेश पहले से है कि किसी भी जमीन की रजिस्ट्री प्राधिकरण बोर्ड से लैंडयूज बदलने के बाद ही होनी चाहिए। कोई भी जमीन किस उद्देश्य से खरीदी जा रही है, यह तभी पता चल पाएगा, जब जमीन का लैंडयूज पहले से निश्चित होगा। बरेली समेत बड़े महानगरों में लगातार बन रहीं अवैध कॉलोनियों से होने वाले राजस्व घाटे को रोकने के लिए पुराने शासनादेश का रिमाइंडर प्राधिकरणों को फिर से भेजा है। उसमें कहा गया है कि अब किसी भी जमीन के प्लाट या मकान की तभी दूसरे के नाम रजिस्ट्री की जाए, जब बीडीए से उसके मानचित्र या ले आउट पर निर्णय का अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल जाए। बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि नया शासनादेश आने के बाद वह जल्द ही इस संबंध में रजिस्ट्री दफ्तर के रजिस्ट्रार को पत्र लिखेंगे कि प्राधिकरण सीमा में आने वाली जमीनों या मकानों की रजिस्ट्री एनओसी लेकर ही करें।