बरेली। सात दिनों से गूंज रही शहनाइयों की धुन रविवार सुबह नौ बजे से एक माह के लिए बंद हो जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, सूर्यदेव के गुरु की राशि धनु में प्रवेश करते ही खरमास प्रारंभ हो जाएगा। शास्त्रानुसार जब सूर्य, गुरु की राशि धनु या मीन में विराजमान रहते हैं, तो उस मास को ‘खरमास’ कहते हैं।
खरमास के दौरान मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं। यह अवधि 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगी। 15 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद फिर से मांगलिक कार्य आरंभ हो सकेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. अनुराग शंखधार ने बताया कि अबकी बार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की नवमी को सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहा है, लेकिन सूर्य का प्रभाव होने से योगों की शुभता निम्न रहेगी। 16 दिसंबर को सुबह नौ बजे सूर्य, गुरु की धनु राशि में प्रवेश करेंगे।
धनु राशि में पहुंचकर वह वहां पहले से मौजूद अपने पुत्र शनि के साथ युति बनाएंगे। दोनों पिता-पुत्र एक साथ धनु राशि में 30 दिन तक रहेंगे। खरमास में सूर्यदेव के रथ की गति धीमी होगी। ऐसे में सर्दी अधिक पड़ने के आसार हैं।