बरेली। ‘साहब’ का खेल इतना जबर्दस्त निकला कि किसानों के साथ सरकार को भी चूना लगाने के खेल के माहिर खिलाड़ी भी हक्के बक्के रह गए। सीबीगंज की राइस मिल में भंडारित करोड़ों के जिस धान पर दस आढ़तियों की ओर से दावेदारी की जा रही थी, उसे रातोंरात सिर्फ दो फर्मों को उठवाकर मैदान साफ कर दिया गया। बाकी आढ़ती मुंह ताकते रह गए, लेकिन अब यह मामला तूल पकड़ने लगा है और इसकी शिकायत बड़े दरबार तक हो गई है। शिकायत करने वाले आढ़तियों का सीधा आरोप है कि जिला प्रशासन के अफसरों ने दो आढ़तियों के साथ मोटी डील कर उन्हें लाखों का फायदा पहुंचा दिया। बड़े पैमाने पर हुई राजस्व की क्षति को भी इस खेल में नजरंदाज कर दिया गया।
पिछले महीने दिल्ली के कालका जी में रहने वाले राकेश सिंह ने फर्म के फर्जी नाम पर परसाखेड़ा स्थित आरके राइस मिल का एक हिस्सा किराये पर लिया था और बासमती, सुगंधा जैसे उच्च श्रेणी के धान की खरीद शुरू कर दी। बाजार की तुलना में 100 से 200 रुपये ज्यादा रेट पर धान खरीद की खबर मिलते ही एटा, अलीगढ़, पीलीभीत और बरेली समेत आसपास के कई जिलों के आढ़तियों ने किसानों से सस्ते भाव में खरीदा गया धान 2000 से 2200 रुपये क्विंटल के रेट में इस फर्म को बेच दिया, मगर किसी भी आढ़ती को राकेश सिंह की ओर से पेमेंट नहीं मिला। इस बीच खुले बाजार में धान की कीमत 1000 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गई तो आढ़तियों ने अपना धान वापस करने या उसका भुगतान करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। तब तक राकेश इस धान का बड़ी मात्रा में चावल बनाकर दिल्ली में बेच चुका था।
पिछले सप्ताह भुगतान न मिलने से परेशान तमाम व्यापारियों ने परसाखेड़ा में आरके राइस मिल पर इकट्ठे होकर वहां भंडारित धान उठाने की कोशिश की तो झगड़ा शुरू हो गया। आपस में झगड़ा नहीं निपटा तो व्यापारियों ने पुलिस को बुला लिया। इसके बाद राकेश सिंह और उसके मैनेजर रिठौरा निवासी अमित गुप्ता ने पुलिस से साठगांठ कर ताला तुड़वा दिया। इसका फायदा उठाते हुए कई व्यापारी यहां से धान लूट ले गए। राइस मिल में धान लूट की जानकारी मिली तो राइस मिल के दिल्ली निवासी पार्टनर कनिष्क मनचंदा भी बरेली आ धमके। पहले तो उन्होंने धान लूटने की शिकायत सीबीगंज पुलिस से की, लेकिन थाने में उनकी एक नहीं सुनी गई तो वह डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से मिलने पहुंचे।
डीएम ने मनचंदा से मदद का वादा कर सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद रात में ही मनचंदा और मंडी समिति की ओर से राकेश सिंह और उसके मैनेजर अमित गुप्ता के खिलाफ थाना सीबीगंज में दो एफआईआर दर्ज करा दी गईं। दूसरे दिन सिटी मजिस्ट्रेट मंडी सचिव एपी गंगवार के साथ फिर राइस मिल पहुंचे और उन्होंने डीएम के निर्देश पर एटा की फर्म प्रेमचंद-मुकेश कुमार को करीब तीन हजार क्विंटल और देवचरा की फर्म आरके ट्रेडिंग को लगभग 1800 क्विंटल धान सुपुर्द करा दिया। इसकी लोडिंग रात भर चली और दोनों फर्में दूसरे दिन दोपहर तक यहां से धान उठाती रहीं। बताया जाता है कि एटा की फर्म तो बरेली की मंडी में ही ऊंचे भाव में मिल से लूटा गया धान बेच गई।
मंडी टैक्स चोरी की अनदेखी कर गए अफसर
आरके राइस मिल परिसर में अवैध रूप से बिना लाइसेंस बड़ी मात्रा में धान खरीदा गया। जानकारों का कहना है कि 30 हजार क्विंटल धान की खरीद हुई जिसकी कीमत करीब 10.50 करोड़ थी। इस पर 2.5 फीसदी के हिसाब से 25 लाख रुपये से अधिक का मंडी शुल्क चोरी किया गया। बताया जाता है कि मिल परिसर में धान कुटाई भी बिजली चोरी से हुई। मगर प्रशासन और मंडी समिति के अधिकारियों ने इस घपले को भी नजरंदाज कर दिया।
आढ़ती बोले- बुखारा में रखा धान हमें दिलाया जाए
करीब पांच हजार क्विंटल बासमती समेत उच्च क्वालिटी का धान अभी भी बुखारा स्थित कपिल खंडेलवाल के गोदाम में रखा है। सूत्रों के अनुसार यह धान भी मंडी शुल्क दिए बगैर खरीदा गया है। भंडारित धान विभिन्न आढ़तियों का है। वे अब दबाव बना रहे हैं कि गोदाम में रखा धान उनको दिलाया जाए। उधर पीड़ित पक्ष कनिष्क मनचंदा 996 बोरे लूटे गए धान को वापस दिलाने की गुहार लगाई है। सीबीगंज पुुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
खेल में भाजपा नेता भी शामिल
बरेली, एटा और अन्य जनपदों के दिग्गज भाजपा नेता भी धान माफियाओं को बचाने में लगे हुए हैं। राइस मिल परिसर से लूटे गए धान में नेताओं और अफसरों का हिस्सा बताया जा रहा है। मंगलवार को भी एटा और अलीगढ़ के कुछ व्यापारी बरेली आए थे। वह अपना धान गोदाम से निकलवाने के प्रयास में लगे रहे। रिठौरा के एक दलाल ने उनको आश्वासन दिया कि अफसरों से उनकी बात हो गई है। वह पैसे का इंतजाम करें। उनका धान गोदाम से निकलवा दिया जाएगा। बताया जाता है कि राकेश सिंह भारत ही नहीं, विदेशों में भी कई बडे़ घपले कर चुका है।