इत्तेहादे मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खां की अगुवाई वाले आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड (जदीद) की कार्यकारिणी की बैठक में कदीमी (पुराने) पर्सनल लॉ बोर्ड पर भाजपा और आरएसएस के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया गया। बैठक में आए उलमा ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचाने के एजेंडे पर काम कर रहा है। यही वजह है कि मुखालिफ ताकतों को इस्लाम पर उंगली उठाने का मौका मिल रहा है। बैठक में तलाक, हलाला, दारुल इफ्ता और दारुल कजा पर भी चर्चा हुई।
तौकीर रजा की सदारत में दरगाह आला हजरत पर हुई बैठक में शरीयत और इस्लाम पर उठ रहे सवालों के लिए पुराने पर्सनल लॉ बोर्ड को जिम्मेदार ठहराया गया। बोर्ड के शरई अदालत कायम करने के बयान पर उलमा इकराम ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। कहा कि पुराना बोर्ड अपनी जिम्मेदारी से भटक चुका है। उसके बयान और फैसले मुसलमानों में बेचैनी की वजह बन रहे हैं। पुराने बोर्ड को इन सब क्रियाकलापों से बाज आने की हिदायत दी गई।
उलमा ने दारुल इफ्ता पर चर्चा करते हुए कहा कि यहां कुरान और हदीस की रोशनी में फैसले होते हैं। इस पर किसी को उंगली उठाने की इजाजत नहीं है। निकाह और तलाक खालिस मजहबी मामले हैं। इन पर न हुकूमत बोल सकती है न अवाम। शरीयत कुरान और हदीस में यकीन रखने वालों के लिए है। लिहाजा जाती रंजिश के लिए शरीयत और मजहब का इस्तेमान न किया जाए। मुखालिफ ताकतें ऐसे लोगों का इस्तेमाल करके इस्लाम को बदनाम कर रही है।
बैठक में उत्तराखंड के मौलाना जाहिद रजा, मौलाना हाशिम कुद्दूसी, मौलाना इमामुद्दीन तहसीनी, यूपी से मुफ्ती रईस अशरफ, मुफ्ती कारी फुरकान रजा, (उत्तर प्रदेश), बिहार के सैय्यद अहमद रजा, मौलाना शाहनवाज, बंगाल के मौलाना सना उल्लाह, झारखंड के मुफ्ती याकूब और दिल्ली के मुफ्ती मोहम्मद नाजिम व मौलाना सुहैल शामिल हुए। इसके अलावा इकराम रजा मिस्वाही, मौलाना अकील अख्तर, कारी मोहम्मद हनीफ साबरी, डॉ. नफीस खां, मुनीर इदरीसी, अफजाल बेग, नदीम खान, सलीम खान आदि भी मौजूद रहे।