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जिलों और तहसीलों में भी होगा मृदा परीक्षण

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बरेली।
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मिट्टी के नमूनों का परीक्षण कराने के लिए आसपास के जिलों के किसानों को अभी बरेली आना पड़ता है। बहुत जल्दी ही यह सुविधा उन्हें अपने ही जिले या तहसील में मिलेगी। बरेली के अलावा पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं में भी मृदा परीक्षण लैब बनेगी। तीनों जिलों की लैब के लिए लखनऊ से स्वाइल टेस्ट मशीन मंगाई गई है। तहसीलों में मृदा परीक्षण लैब बनाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को आमंत्रित किया जा रहा है। इसके टेंडर अगले महीने निकाले जाएंगे।
अभी बरेली के अलावा बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर के किसानों को भी खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच कराने के लिए बिलवा स्थित सरकारी लैब या फिर आईवीआरआई की लैब आना पड़ता है। अगर किसान दोनों लैब में मिट्टी के नमूनों के परीक्षण से संतुष्ट नहीं होते हैं तो पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय, चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर या फिर पूषा विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से जांच कराते हैं। अमर उजाला ने कृषि विभाग की मंडल स्तरीय लैब में पौने दो लाख मिट्टी के नमूनों की जांच न हो पाने का मामला उठाया था। इसके बाद हरकत में आए कृषि विभाग ने मंडल के तीन जिलों में मृदा परीक्षण लैब स्थापित करने के लिए स्वाइल टेस्ट मशीनें मंगवाई हैं। एक मशीन की लागत 22 लाख है। इन्हें फिलहाल कृषि विभाग के सरकारी दफ्तर या किसी सुरक्षित बिल्डिंग में रखा जाएगा। संजीव कुमार सिंह (सहायक निदेशक, मृदा परीक्षण) ने बताया कि जिले स्तर की स्वाइल टेस्टिंग मशीन से हर दिन 200 नमूनों की जांच हो सकेगी। किसानों से इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। नमूनों की जांच के लिए अगले महीने हैदराबाद से कृषि विशेषज्ञों की टीम आएगी।
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प्राइवेट सेक्टर की भी लेंगे मदद
डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर विनोद कुमार का कहना है कि मंडल और जिला स्तर पर बड़ी लैब स्थापित करने के लिए प्राइवेट सेक्टर को भी आमंत्रित किया गया है। कोई भी व्यक्ति (जिसके पास स्वाइल टेस्टिंग का प्रशिक्षित स्टाफ और बिल्डिंग है) मशीन मंगाकर स्वाइल टेस्ट कर सकता है। इसके लिए कृषि विभाग 150 रुपये प्रति नमूने के हिसाब से भुगतान करेगा। किसानों को फीस नहीं देनी पड़ेगी।
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