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बंद राइस मिल में चल रही आढ़त का लाइसेंस निलंबित

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पुवायां (शाहजहांपुर)। खुटार के बंद राइस मिल में चलाई जा रही लक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी (आढ़त) का लाइसेंस अनियमितताओं के चलते निलंबित कर दिया गया है। आढ़त मालिक ने 15 दिन में गेहूं खरीद कर किसानों को पांच लाख से अधिक रुपये की चपत लगाई है, वहीं मंडी को भी शुल्क का नुकसान हुआ है।
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गौरतलब है कि अमर उजाला ने एक मई के अंक में ‘बंद राइस मिल में सरकारी गेहूं की तौल’ शीर्षक से खबर को प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद डीएम ने मातहतों के पेंच कसे तो खलबली मच गई थी। बुधवार दोपहर जब तक डिप्टी आरएमओ बंद राइस मिल तक पहुंचे तब तक वहां से एक सेंटर बारदाना सहित तमाम गेहूं हटा दिया गया था। मौके पर पहुंचे डिप्टी आरएमओ जिया करीम ने मिल के बाहर की ओर चल रही आढ़त (लक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी) पर अभिलेखों की जांच की थी तो तमाम अनियमितताएं सामने आई थीं। सिक्स आर और नाइन आर में भी गड़बड़ी सामने आई थी। मौके पर 960.60 क्विंटल गेहूं भी पड़ा पाया गया था। डिप्टी आरएमओ ने पूरे मामले की आख्या मंडी सचिव को प्रेषित की थी।
बृहस्पतिवार को मंडी सचिव ने मंडी समिति से संबंधित आढ़त के सभी अभिलेख अपने कब्जे में ले लिए। जांच में पाया गया कि आढ़त पर 15 दिन में 4782.10 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है, जिसमें 1185.85 क्विंटल गेहूं ही बाजार दर 1750 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा गया है। शेष 3596.25 क्विंटल गेहूं मात्र 16 सौ रुपये प्रति क्विंटल खरीदा गया है। इससे किसानों को 537839 रुपये की चपत लगी है। साथ ही बाजार भाव से कम पर गेहूं खरीद कर मंडी शुल्क और विकास सेंस की मद में सरकार को 13446 रुपये की चपत लगा दी गई। मंडी सचिव शैलेंद्र कुमार ने बताया कि 22 सिक्स आर की जांच में पता चला कि आढ़त स्वामी ने मंडी समिति के अभिलेख सिक्स आर को मनमाने ढंग से बाजार भाव से कम दर पर जारी कर फर्म ने मंडी शुल्क और विकास सेस का अपवंचन किया है। यह मंडी अधिनियम की धाराओं एवं प्रदत्त लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन है। इस कारण मंडी अधिनियम की धारा 17 (1) (2) नियम 71 और 72 के अधीन आढ़त का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। अवशेष स्टाक 960.60 क्विंटल के विक्रय के लिए फर्म मालिक को 15 दिन का समय दिया गया है।
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असली मामले की जांच अभी बाकी
पुवायां। बंद पड़े राइस मिल में सरकारी खरीद के मामले में अधिकारी लीपापोती पर उतर आए हैं। आढ़त का लाइसेंस निलंबित किए जाने की प्रक्रिया की गई है और आढ़त मालिक को बाजार मूल्य ये कम मूल्य पर गेहूं खरीद का दोषी पाया गया है, लेकिन यह जांच नहीं की गई कि जो सरकारी तौल चल रही थी, वह किस सेंटर की थी। सेंटर पर खरीद की जांच से बचा गया है, जबकि सेंटर की खरीद चेक की जाए तो पुवायां के इस सेंटर पर ज्यादातर खरीद खुटार के किसानों की मिलेगी। क्योंकि गेहूं खुटार में खरीदा जा रहा था। बड़ा सवाल है कि खुटार का किसान पुवायां के सेंटर पर गेहूं बेचने क्यों आएगा, लेकिन इस जांच को किनारे कर दिया गया है।

तमाम आढ़तों पर निकलेगा घपला
पुवायां। सरकार ने गेहूं का सरकारी रेट 1840 रुपये प्रति क्विंटल और प्रति क्विंटल 20 रुपये छनाई आदि के घोषित कर रखे हैं। सेंटर पर इस रेट से खरीद की जाती है। प्राइवेट खरीद के लिए सरकार ने बाजार रेट 1750 रुपये घोषित कर रखा है, लेकिन लक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी की तरह तमाम फर्में 16 सौ 1650 रुपये प्रति क्विंटन गेहूं खरीद कर सिक्स आर काट रही हैं। मामला पकड़े जाने पर मंडी शुल्क भर दिया जाता है, लेकिन बड़ा सवाल है कि किसान को प्रति क्विंटल 150 रुपये की जो बड़ी चपत लगाई गई है उसकी भरपाई कैसे होगी। मंडी सचिव शैलेंद्र कुमार ने बताया कि आढ़त ने कम रेट में गेहूं खरीद कर मंडी शुल्क कम दिया वह वसूला जाएगा।
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