बरेली। गन्ना पेराई का मौजूदा सत्र खत्म होने वाला है। इस सत्र में तीन करोड़ 40 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद का अनुमान है। पेराई क्षमता के हिसाब से पर्याप्त गन्ना न मिलने की वजह से अब चीनी मिलें धीरे-धीरे बंद हो रही हैं। तीन चीनी मिलें बंद भी हो चुकी हैं, बाकी बची दो मिलों के प्रबंधन ने बंद करने का नोटिस दे दिया है। वहीं गन्ना विभाग अगले सीजन में गन्ना बुवाई के लिए नया सर्वे शुरू कराने जा रहा है। यह सर्वे एक मई से प्रारंभ होकर 30 जून तक चलेगा। इसमें गन्ना सोसायटियों और शुगर मिल कर्मचारियों की टीम पंजीकृत प्रत्येक किसान के खेतों पर जाकर सर्वे करेगी।
मंडल के बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बदायूं में गन्ना बुवाई का रकवा तय करने के लिए एक मई से किसानों के खेतों का सर्वे प्रारंभ होगा। मंडलीय कार्यालय में गन्ना उपाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने इसके लिए मंगलवार को विभागीय अफसरों और कर्मचारियों की मीटिंग की। इसमें तय किया गया कि गन्ने की बुवाई का सर्वे कराने के लिए करीब 150 टीमें बनाई जाएंगी। सर्वे टीम में गन्ना पर्यवेक्षक, सोसायटी और शुगर मिल कर्मचारी शामिल होंगे। सर्वे टीम के सदस्य गन्ना सोसायटी में रजिस्टर्ड प्रत्येक किसान के खेत पर जाकर यह देखेंगे कि कौन सा किसान कितने खेत में गन्ने की बुवाई कर रहा है? इतना ही नहीं, किसानों को इस बार सामान्य या परंपरागत प्रजाति के गन्ने के बजाय अत्याधुनिक और उपज के लिहाज से बेहतर 0238 प्रजाति का गन्ना बोने के लिए प्रेरित किया जाएगा क्योंकि यह प्रजाति अब तक समस्त गन्ना प्रजातियों में सबसे ज्यादा उन्नतशील है।
2500 से 3000 क्विंटल तक है उपज
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह के अनुसार 0238 प्रजाति का गन्ना किसानों के लिए बेहतर है। इस प्रजाति के गन्ने की उपज कम से कम 1000 क्विंटल और अधिक से अधिक 3000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। किसान इस प्रजाति के गन्ने की बुवाई करने के बाद उसकी बेहतर देखभाल करके एक साल में 10.50 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी कर सकता है क्योंकि गन्ने की अन्य प्रजातियों से चीनी की रिकवरी 9.0 से 10 किलो प्रति क्विंटल की है, जबकि 0238 प्रजाति के गन्ने से चीनी की रिकबरी 12.0 किलो प्रति क्विंटल है। डीसीओ के मुताबिक सर्वे के दौरान किसानोें से इसी प्रजाति का गन्ना बोकर आमदनी दो से तीन गुनी तक बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।