लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की टीम ने सोमवार को बमनगर के पास बाघ की हड्डियों के साथ एक शिकारी को धर दबोचा। उसके पास से बाघ की पांच हड्डियां बरामद हुई हैं। इस दौरान एक शिकारी भाग निकलने में कामयाब हो गया। पकड़े गए शिकारी फरियाद उर्फ लंबू और फरार शिकारी रिजवान उर्फ बंगाली पीलीभीत जिले में छह और नेपाल में पांच बाघों के शिकार के मामलों में वांछित था। नेपाल सीआईबी, यूपी एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण और अनुसंधान ब्यूरो को लंबे अरसे से तलाश थी।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की पलिया रेंज के वनकर्मियों को मुखबिर से सूचना मिली कि संगठित वन अपराध गिरोह का सरगना फरियाद उर्फ लंबू अपने साथी रिजवान उफ बंगाली के साथ बाघ अंगों को तस्करी के लिए नेपाल ले जाने वाला है और वे बमनगर चौराहे से गुजरने वाले हैं। इस सूचना पर वनकर्मियों ने बमनगर चौराहे से सुमेरनगर रोड पर नाकाबंदी कर फरियाद उर्फ लंबू को दबोच लिया जबकि रिजवान मौके से भागने में सफल रहा। तलाशी के दौरान फरियाद के पास से एक प्लास्टिक थैला बरामद हुआ जिसमें बांध की पांच हड्डियां थीं।
पकड़ा गया आरोपी फरियाद उर्फ लंबू जिले के नहरौसा गांव का निवासी है। इसके खिलाफ बाघ के शिकार और तस्करी के 11 मामले दर्ज हैं। इसमें पीलीभीत टाइगर रिजर्व में छह और नेपाल के पांच मामले शामिल हैं।
डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि जंगल किनारे पिछले तीस-चालीस वर्षों से लगने वाली अवैध गौढ़ियां इनके अड्डे थे जहां रहकर यह शिकार करते थे। इन गौढ़ियों को पिछले दिनों खाली कराया गया था। फरियाद नेपाल के गिरोह को माल बेचता था। पीलीभीत में शिकार के मामले में उसने वर्ष 2014 में न्यायालय में समर्पण किया और उसके बाद एक साल जेल में रहा। पूछताछ में उसने बताया कि जमानत पर छूट कर आने के बाद भी वह बाघ के शिकार और तस्करी में लिप्त रहा। फरियाद पर पुलिस ने गुंडा एक्ट भी तामील कराया था। वह अन्य कई प्रकार के अपराधों में भी शामिल रहा। पिछले कई महीनों से वह इंडो-नेपाल बार्डर के दोनों तरफ छिपकर गिरोगह चला रहा था। गिरफ्तारी के वक्त फरियाद बाघ की हड्डियों का नमूना लेकर खरीदार से डील करने नेपाल जा रहा था। आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत जेल भेज दिया गया है।