बरेली। पिछले साल जिले में महामारी की तरह फैले फेल्सीपेरम मलेरिया से दो सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। मौसम में आए बदलाव से फेल्सीपेरम का प्रकोप थमा, तो स्वास्थ्य विभाग ने अपनी पीठ थपथपाक र चादर ओढ़ ली। जबकि फरवरी में भी फेल्सीपेरम के मामले अस्पताल पहुंचते रहे। अब मार्च शुरू होने के साथ ही फिर मच्छरों ने डंक मारना शुरू किया तो स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। फजीहत से बचने के लिए प्रभावी कार्रवाई की योजना पर मंथन शुरू कर दिया है।
बृहस्पतिवार को एडी हेल्थ कार्यालय में मंडल स्तरीय बैठक हुई, जिसमें संचारी रोग अभियान को पूरी गति से चलाने और रोगों की रोकथाम के निर्देश दिए गए। वृहद स्तर पर मच्छरों की संख्या बढ़ने से रोकने और फेल्सीपेरम मलेरिया की रोकथाम और बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने का आदेश दिया गया है। इसके लिए पूर्व में संचालित संचारी रोग अभियान के सहयोगी जिला पंचायत, कृषि, नगर निगम समेत सभी नौ विभागों का सहयोग लेने का सुझाव दिया गया है। फ ॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव, कांटेक्ट सर्वे आदि गतिविधियों का खाका तैयार कर वेक्टर कंट्रोल के लिए अप्रैल के आखिर में अथवा मई की शुरुआत में लागू करने की योजना बनाई है।
प्राथमिकता में संवेदनशील ब्लॉक
डीएमओ देशराज सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष मझगवां, भमोरा, रामनगर, फरीदपुर में सर्वाधिक फेल्सीपेरम मलेरिया के मरीज मिले थे। प्राथमिक स्तर पर इन इलाकों के प्रभावित हुए गांवों में वेक्टर कंट्रोल की कार्रवाई की जाएगी। आशा वर्कर के जरिये संबंधित ब्लॉकों की ग्राम पंचायत में संपर्क कर मलेरिया पीड़ितों पर नजर रखी जाएगी।
यूं किया जाएगा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
जिले में जहां भी पहले फेल्सीपेरम मलेरिया का मामला सामने आएगा। वहां रेपिड रिस्पॉन्स टीम पहुंचकर प्रभावित रोगी के आवास समेत आसपास के क्षेत्र में फॉगिंग, डीडीटी छिड़काव करेगी। प्रत्येक घर पहुंचकर सर्वे करेगी। बुखार से पीड़ितों का सैंपल लेकर जांच कराएगी। साथ ही रोग के बाबत क्षेत्र वासियों को जागरूक करेगी।