बरेली। नगर निगम में सोमवार को स्मार्ट सिटी एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई, इसमें मेयर उमेश गौतम ने एडवाइजरी कमेटी की सहमति के बिना स्मार्ट सिटी बोर्ड में प्रोजेक्ट रखने को लेकर स्मार्ट सिटी की कंपनी श्रेयी के अधिकारियों से सख्त नाराजगी जताई। समीक्षा के दौरान उन्होंने डेलापीर के प्रोजेक्ट में जाम से निजात दिलाने के इंतजाम न देख उसके टेंडर पर रोक लगाते हुए सुधार की बात कही।
कमिश्नर रणवीर प्रसाद की अध्यक्षता में 14 फरवरी को स्मार्ट सिटी की बैठक हुई थी, इसमें 514.54 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए रखे गए थे। इन प्रोजेक्ट में डेलापीर का सौंदर्यीकरण, स्मार्ट क्लास, ओपन जिम और ब्रांडिंग के प्रस्ताव थे। बैठक में इन चारों प्रोजेक्ट पर पहले चरण में 12.23 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी मिल गई। शनिवार को नगर निगम में एडवाइजरी बोर्ड की बैठक बुलाई गई। इसमें मेयर उमेश गौतम ने स्मार्ट सिटी बोर्ड से पहले यह प्रोजेक्ट एडवाइजरी बोर्ड के समक्ष न रखने पर नाराजगी जताई। साथ ही स्मार्ट सिटी की कंपनी श्रेयी के अधिकारियों को आगे से ऐसा दोबारा होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। बैठक में स्मार्ट सिटी के सीईओ एवं नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव, चीफ इंजीनियर एसके अंबेडकर, एक्सईएन संजय चौहान, तकनीकी विशेषज्ञ सुशील शौरी, लेखाधिकारी एचपी नारायण, पारुल मलिक के अलावा श्रेयी के अधिकारी मौजूद रहे।
483.04 करोड़ का है प्रोजेक्ट तो जाम क्यों
डेलापीर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, ट्रैफिक जंक्शन, सड़क चौड़ीकरण, नॉन मोटराइज ट्रैक और सौंदर्यीकरण के लिए 483.04 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया गया है। एडवाइजरी कमेटी ने इस प्रोजेक्ट पर चर्चा की तो सामने आया कि डेलापीर और सौ फुटा की ओर जाम लगने की आशंका हैं। इस पर मेयर ने इन कमियों का सुधार करने के बाद ही टेंडर निकालने के निर्देश दिए। पहले चरण में 7.75 करोड़ रुपये से इस प्रोजेक्ट में नॉन मोटराइज ट्रैक, सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य होगा।
तीन टेंडर को हरी झंडी
बैठक में स्मार्ट क्लास, ओपन जिम और ब्रांडिंग के टेंडर निकालने को हरी झंडी दी गई। पहले चरण में स्मार्ट क्लास पर 1.91 करोड़, ओपन जिम पर 1.57 करोड़ और ब्रांडिंग पर एक करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।