बरेली। करीब 18 महीने से पुरानी जिला जेल की जमीन पर भव्य परियोजना ‘बरेली सेंट्रल’ को साकार करने की कवायद चल रही थी। इस परियोजना के लिए करीब शहर के बीचोबीच करीब 72 एकड़ जमीन को विकसित करने का खाका भी खींचा गया। जिला प्रशासन से शासन और सरकार तक इस प्रोजेक्ट पर जमकर एक्सरसाइज हुई। पिछले साल स्थानीय निकाय चुनावों में प्रचार करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद सर्किट हाउस में इस परियोजना को सराहा, लेकिन अब यह परियोजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है। शासन ने फिर इस जमीन पर जिला जेल स्थापित करने का फैसला ले लिया है। इसके बाद उन सभी विभागों में हलचल शुरू हो गई है जो इस जमीन पर अपने-अपने प्रोजेक्ट लाने की कोशिशों में जुटे हुए थे।
दिसंबर 2016 में तत्कालीन सरकार ने जिला जेल को सैदूपुर स्थित नए भवन में शिफ्ट करा दिया था। इसके बाद पुरानी जिला जेल की खाली हुई जमीन पर कभी लोहिया पार्क तो कभी आवासीय योजना लाने की चर्चाएं शुरू हो गईं। इसी बीच विधानसभा चुनाव हुए और सरकार बदल गई। नई सरकार ने इस जमीन पर नए सिरे से विकास का खाका खींचा। जाने माने आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना को इसमें लगाया गया। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल सीधे इसमें दिलचस्पी लेने लगे। राजेश अग्रवाल ने ‘बरेली सेंट्रल प्रोजेक्ट’ की फाइल ऊपर तक बढ़वायी तो मुख्य सचिव स्तर पर बैठकें शुरू हो गईं। संबंधित विभागों से आए प्रस्तावों के मुताबिक उनके लिए भी जगह चिह्नित कर दी गईं। हालांकि इस बीच तत्कालीन कमिश्नर ने कुछ कॉलोनाइजरों को भी इस परियोजना में जगह दिलाने की हामी भर ली। हालांकि बाद में मुख्य सचिव ने इसको लेकर उनकी क्लास भी ली।
उस दौरान इस जमीन की कीमत 17 सौ करोड़ आंकी गई थी। मामला तब खटाई में पड़ना शुरू हुआ जब यहां न्यायालय और न्यायिक अधिकारियों के आवास बनाने के लिए भी जगह मांग ली गई। इस बीच शासन स्तर पर हुई समीक्षा बैठकों में पाया गया कि सैदुपुर में शिफ्ट हुई नई जेल में जगह कम पड़ रही है। लिहाजा महिला जेल को पुरानी जेल परिसर में ही रखा जाए। उधर, सेंट्रल जेल प्रशासन ने भी क्षमता से ज्यादा कैदी होने की बात उठा दी। इस पर कारागारों की व्यवस्था में सुदृढ़ीकरण के लिए जेल सुधार समिति का गठन कर दिया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नई जेल में क्षमता कम है इसलिए पुरानी जेल को फिर संचालित किया जाए और सैदुपुर स्थित भवन में केंद्रीय कारागार के रूप में संचालित किया जाए। शासन ने समिति की संस्तुति पर अपनी मुहर लगा दी है। इसे कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद ‘बरेली सेंट्रल परियोजना’ पूरी तरह ध्वस्त हो गई।
‘बरेली सेंट्रल योजना’ में ये थे प्रस्ताव
- आईटी पार्क
- दीन दयाल प्रतिष्ठान (कन्वेंशन सेंटर)
- संगीत, नृत्य, नाट्य, कला अकादमी
- हेरिटेज पार्क
- पर्यटन व होटल
- संग्रहालय/प्रदर्शनी
- दो बिजलीघर
- उद्योग, परिवहन
- न्याय पालिका परिसर
- डिग्री कॉलेज
- स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स
- कॉमर्शियल सेंटर आदि
सिर्फ बिजली उपकेंद्र बन सका
72 एकड़ भूमि पर करीब 17 विकास कार्य प्रस्तावित थे। सफलता सिर्फ बिजली विभाग को मिली। विभागीय अफसरों ने दौड़भाग कर किसी तरह एक बिजली घर तैयार करा दिया और तीन माह पहले जनता को समर्पित भी कर दिया। अब सिर्फ मालगोदाम मार्ग की ओर प्रस्तावित बिजली घर बनना बाकी रह गया है।
प्रतिक्रिया फोटो
‘बरेली सेंट्रल परियोजना’ शहरी विकास के लिए मील का पत्थर साबित होती। शासन ने जो फैसला लिया होगा वह भी बेहतर ही होगा। - अनुपम सक्सेना, आर्किटेक्ट
शासन ने कारागारों की व्यवस्था में सुदृढ़ीकरण के लिए गठित जेल सुधार समिति गठित की थी। समिति ने जेल में क्षमता कम बताई, इसलिए समिति की रिपोर्ट पर पुरानी जेल को फिर से संचालित करने का फैसला लिया है। - वीके सिंह, डीएम
0 बार-बार विकास प्रोजेक्ट के लिए मच रही थी खींचतान
0 शासन स्तर तक पहुंचा था बरेली सेंट्रल प्रोजेक्ट, प्लानिंग तक हुई
0 बरेली बार एसोसिएशन ने भी की थी जमीन की मांग
0 अब प्रमुख सचिव ने जेल सुधार समिति की अत्यधिक बंदी वाली
0 रिपोर्ट का हवाला देकर पुरानी जिला जेल की जरूरत जताई