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स्थापना से विसर्जन तक गणपति पूजन का हर दिन शुभ सौ वर्षों बाद बना है यह संयोग

Fri, 14 Sep 2018 12:20 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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रिद्धि सिद्धि के दाता गणपति भगवान बृहस्पतिवार को गुरु स्वाति नक्षत्र में विराजे हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक करीब सौ वर्षों बाद ऐसा संयोग आया है जब स्थापना से विसर्जन तक हर दिन शुभ योग बन रहा है। इसके चलते इस बार गणपति पूजन का हर दिन मनोकामना पूर्ति के लिए फलदायी रहेगा।
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ज्योतिषाचार्य पं. मुकेश मिश्रा ने बताया कि पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष चतुर्थी पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था जिस पर इस बार गुरु स्वाति नक्षत्र का योग बना है। 23 सितंबर को विसर्जन तक गणेशोत्सव में हर दिन शुभ योग बन रहा है। इस बीच एक भी क्षय तिथि नहीं होगी। 13 सितंबर को गणेश चतुर्थी स्वाति नक्षत्र के स्थिर नाम के शुभ योग से शुरू हुई है जिसमें गणपति की स्थापना करने पर सुख और समृद्धि की प्राप्ति होगी। इसके अलावा 14 सितंबर को गजकेसरी का राजयोग है। 15 सितंबर को अमृत, 16 सितंबर को रवि, 17 सितंबर को प्रीति, 18 सितंबर को आयुष्मान, 19 सितंबर को सौभाग्य, 20 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि, 21 सितंबर सुकर्म और 22 सितंबर को धृति योग बनेगा।

यह है स्वाति नक्षत्र का महत्व
वैदिक पंचांग के मुताबिक चतुर्थी तिथि के दिन गुरु-स्वाति संयोग होने से गणेश जी की स्थापना सिद्धिदायक मानी गई है। बता दें कि 27 नक्षत्रों में स्वाति नक्षत्र का स्थान 15वां है। इसे शुभ और कार्यसिद्ध नक्षत्र माना गया है। इस नक्षत्र के अधिपति देवता वायुदेव होते हैं जिसके चारों चरण तुला राशि के अंतर्गत आते हैं। इसका स्वामी शुक्र है जो धन-संपदा और भौतिक सुख का प्रतिनिधि ग्रह है।
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