मलेरिया से एक निजी अस्पताल में भर्ती गर्भवती सिद्धि देवी और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। दर्दनाक वाकया के बाद फतेहगंज पश्चिमी के गांव भोलापुर में रहने वाले परिवार में कोहराम मच गया। वहीं सिंचाई मंत्री धर्मपाल के पैतृक गांव गुलड़िया से महज एक किमी दूरी पर स्थित बड़ा गांव में एक आठ साल के मासूम वंश समेत दो लोगों की मौत मलेरिया से हो गई। इन मौतों के बाद मरने वालों की संख्या 68 हो चुकी है।
सिंचाई मंत्री के गांव बड़ा गांव में पीएचसी बनी हुई हैं, लेकिन यहां स्टाफ नहीं है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक किसान वीरु का बेटा वंश कक्षा तीन का छात्र था। उसको बुखार आ रहा था। जांच में मलेरिया की पुष्टि हुई थी। वहीं गांव के राम प्रसाद (50) को भी मलेरिया हुआ था। दोनों ने बुधवार को दम तोड़ दिया। जिसकी जानकारी सरकारी डॉक्टरों को दी गई है। यहां पीएचसी प्रभारी बताते हैं कि ड्यूटी तीन दिन बड़ा गांव में, जबकि तीन दिन बरसा गांव में रहती है। मीरगंज के गांव दियोरिया अब्दुल्लागंज में बुधवार सुबह 12 साल के हुजैफ खान की भी मलेरिया से मौत हो गई। ग्राम पंचायत बल्लिया के मजरा थानपुर के 24 वर्षीय ओमकार की मौत हो गई। फतेहगंज पश्चिमी के गांव भोलापुर में गांव के नन्हेलाल जाटव के पांच वर्षीय बेटे गौरव की मंगलवार रात और पांच वर्षीय पिंटू यादव की भी तेज बुखार से मौत हो चुकी है। टीहरखेड़ा गांव में भी मंगलवार शाम 80 साल के बुजुर्ग सिपाहीलाल शर्मा की बुखार से मौत हो गई।
पहले मां की अब बेटी की भी बुखार से मौत
बिशारतगंज के मझगवां ब्लॉक के गांव कन्धरपुर में बुधवार को तीन बच्चों की बुखार से मौत हो गई। पंचम की पत्नी कुषमा देवी की पांच दिन पहले मौत हुई थी। बुधवार को उनकी तीन साल की बेटी कमलेश ने भी दम तोड़ दिया। इसी गांव के कुंवरपाल की आठ वर्षीय बेटी रौनी व जयपाल के एक माह के बेटे अनमोल की मौत हो गई। जैतपुर शरीफपुर गांव निवासी 60 वर्षीय मल्लू सैफी ने दम तोड़ दिया।
एक पखवाड़े के अंदर देवचरा में ग्यारह जान गईं
बरेली। जानलेवा बुखार की वजह से बीते एक पखवाड़े में देवचरा के गांवों में ग्यारह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें नत्थू खां (50), कन्हैया सागर (7), अनामिका (14), ओमवती (50), हीरामति (50), रामपूरक राठौर (55), प्रीतम, अनमोल (3 माह) सहित ग्यारह लोग शामिल हैं। अभी भी दर्जनों लोग बुखार से पीड़ित हैं।