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Bareilly News: डायरिया की चपेट में आए 18 हजार बच्चे, 27 सौ रहे गंभीर

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बरेली। जेठ की गर्मी और आषाढ़ की उमस बच्चों की सेहत पर भारी रही। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अस्पताल में एक जून से अब तक इलाज कराने पहुंचे 18 हजार बच्चे डायरिया से पीड़ित रहे। इनमें से 2,700 की हालत संवेदनशील रही। बेहद गंभीर चार बच्चों को दौरे पड़ने लगे थे। उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया। फिलहाल, इलाज के बाद वे भी स्वस्थ हैं।
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स्वास्थ्य विभाग एक जून से स्टॉप डायरिया मुहिम चला रहा है। इसके तहत जिला अस्पताल, 300 बेड अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर इलाज के लिए पहुंचने वालों बच्चों की जांच कर उन्हें ओआरएस के पैकेट वितरित किए जा रहे हैं। डायरिया पीड़ित बच्चों का रिकॉर्ड रोजाना स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। एक जून से अब तक उल्टी, दस्त, बुखार अन्य तकलीफ होने पर इलाज कराने पहुंचे करीब डेढ़ लाख बच्चों की जांच हुई तो 18 हजार में डायरिया की पुष्टि हुई। संवाद

जिला अस्पताल में 500 से ज्यादा बच्चों का हुआ इलाज
जिला अस्पताल बच्चा वार्ड, ओपीडी के रिकॉर्ड पर गौर करें तो एक जून से अब तक पांच सौ से ज्यादा बच्चों में डायरिया की पुष्टि हुई। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, ओपीडी में डायरिया के लक्षण वाले तीन सौ बच्चे आए। वहीं, वार्ड में करीब दो सौ बच्चे अब तक भर्ती हो चुके हैं।
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बच्चों का कराएं टीकाकरण
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, पांच वर्ष तक की उम्र के बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए सरकार की ओर से निशुल्क रोटावायरस वैक्सीन की ओरल ड्रॉप पिलाई जाती है। यह पेंटावेलेंट (डिप्थीरिया, टेटनस, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी, हीमोफिलिस इंफ्लूएंजा) टीकाकरण के दौरान पिलाया जाता है। यह सुरक्षित और प्रभावी है। इसलिए बच्चों का टीकाकरण जरूर कराएं।

चार बच्चे हुए भर्ती
बीते दो सप्ताह तक जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड फुल रहा। अब पारा सामान्य स्तर पर पहुंचने से बेड खाली होने लगे हैं। बृहस्पतिवार को ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे करीब डेढ़ सौ बच्चों में से 60 उल्टी-दस्त से पीड़ित रहे। देर शाम तक डायरिया पीड़ित चार बच्चे वार्ड में भर्ती हुए तो कुल संख्या 17 हो गई।
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इन बातों का रखें ध्यान
- दूध की बोतल गर्म पानी से साफ करें। तीन घंटे बाद बोतल के दूध को गुनगुना कर लें।
- साफ-सफाई रखें। बच्चों को बासी भोजन न दें। बाहर के खुले में रखे खाद्य पदार्थ, फल न खाएं।
- शिशु को डायरिया से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण कराएं।
- दस्त, बुखार होने पर बच्चों को ओआरएस पिलाएं। चिकित्सक के परामर्श से ही दवा दें।
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