मुख्य अभियंता ने दो एक्सईएन को जारी किए कारण बताओ नोटिस
बरेली। नगर निगम के दो अधिशासी अभियंता 18 करोड़ के निर्माण कार्यों के टेंडर पूल कराने की कोशिश में कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने फाइल को ही दबा दिया। इस रकम से शहर के अलग-अलग इलाकों में सड़कें, खड़ंजे और नालियां बननी थीं। हाल ही में समीक्षा के दौरान यह मामला जानकारी में आने के बाद मुख्य अभियंता ने दोनों अधिशासी अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
साल 2020 के अंतिम दौर में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए 18 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। सूत्रों के मुताबिक अलग-अलग निर्माण कार्यों की फाइल तैयार होने के बाद टेंडर मांगने के निर्देश दिए गए। नगर निगम के जिन दो अधिशासी अभियंताओं के पास टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने कुछ ठेकेदारों से सांठगांठ कर टेंडर पूल कराने की कोशिश की। इसी वजह से टेंडर मांगने का काम टलता रहा। जब टेंडर अभियंताओं की मंशा के मुताबिक पूल नहीं हो पाए तो उन्होंने इन फाइलों को दबाकर नई फाइलों पर काम शुरू कर दिया।
मुख्य अभियंता भूपेश कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को समीक्षा की तो 18 करोड़ की फाइलें डंप होने का पता चला। उन्होंने इस पर दोनों अधिशासी अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, साथ ही 15 दिन के अंदर नियमों के मुताबिक सभी निर्माण कार्यों के टेंडर कराने के भी निर्देश दिए हैं।
जांच में पता चला कि निविदा स्वीकृति पत्रावलियां निविदा मांगने के बाद काफी देरी से प्रस्तुत की जा रही हैं। ऐसा लग रहा है कि अधिशासी अभियंता स्तर पर विकास कार्यो में अनुश्रवण और पर्यवेक्षण हो ही नहीं रहा है। निविदाएं खुलने के बाद 15 दिन में प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी। - भूपेश कुमार सिंह, मुख्य अभियंता नगर निगम
छह महीने दबी रही फाइल पार्षदों ने भी नहीं ली सुधि
पब्लिक से बड़े-बड़े वादे करने वाले पार्षद अपनी जिम्मेदारियों के प्रति कितने सजग हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छह महीने तक निर्माण कार्यों की फाइलें दबी रहने के बावजूद किसी ने इस पर आपत्ति नहीं की। वह भी तब जब 18 करोड़ की धनराशि से ज्यादातर काम मोहल्लों में छोटी सड़कों, नालियों और खड़ंजों के होने थे।