बरेली। जिला अस्पताल में गंदगी के चलते भर्ती दो मरीजों के फैल्सीपेरम मलेरिया की चपेट में आने के बाद सेहत महकमा गंभीर हुआ है। वार्ड गली में मंगलवार को जहां कुत्ता सोता मिला था और जगह-जगह गंदगी फैली थी, वहां बुधवार सुबह से ही कई कर्मचारी सफाई करने में जुट गए। बदबू और गंदगी से जिस शौचालय के पास मरीज और तीमारदार जाने का साहस नहीं जुटा पाते थे, बुधवार को वहां फिनाइल की गंध आती मिली। स्टाफ नर्स भी बेडशीट को बदलती नजर आई।
कई दिन पहले पेट और सीने में दर्द के कारण जिला अस्पताल में भर्ती किए गए निशू कुमार और अशोक इलाज के दौरान ही फैल्सीपेरम मलेरिया की चपेट में आ गए। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को जब दोनों के भर्ती वाले वार्ड का जायजा लिया तो वहां गंदगी ही गंदगी नजर आई थी। पीड़ित मरीज के तिमारदारों ने भी अस्पताल की गंदगी व मच्छरों की बात कही थी। बुधवार के अंक में छपी इस खबर के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। सीएमएस विभागीय कार्य से जिले से बाहर गए थे, लेकिन फोन पर ही व्यवस्था का फीडबैक लेते रहे और सफाई व्यवस्था को लेकर दिशा निर्देश देते रहे। इसके चलते सुबह से ही अस्पताल का स्टाफ साफ सफाई में जुट गया। कई सफाईकर्मी इमरजेंसी के ऊपर स्थित जनरल व महिला वार्ड को चमकाने के लिए सर्फ, फिनायल आदि लेकर जुट गए। पाइप लगा पानी से पूरे वार्ड की धुलाई की गई। शौचालय से लेकर वार्ड की गली तक चमकाई गई। वार्डों की सिर्फ फर्श ही नहीं रगड़ रगड़ साफ की गई दीवारों को भी रगड़ रगड़ चमका दिया गया।
रविवार को भर्ती हुए पूरनपुर के गांव नदहा निवासी अनिल ने बताया कि उनके बेड की गंदी चादर बदल कर साफ चादर बिछा दी गई। चोरहा नवदिया निवासी जितेंद्र यादव ने बताया कि बुखार आने पर वह मंगलवार को जब अस्पताल आए थे तो बहुत गंदगी थी। शौचालय के करीब पहुंचने तक का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। बुधवार को सफाई देख काफी बदलाव दिखा। पांच दिन पहले भर्ती हुए बीसलपुर निवासी राधे ने बताया कि बुधवार को बेड की चादर बदली गई। जैसी सफाई हुई वैसी पहले नहीं होती थी।