बरेली। मतदान के दिन भाजपा के आईटी सेल दफ्तर पर भीड़ के हमले के मामले में व्यापारी गुरुवार को डीआईजी से मिले। कहा कि बारादरी पुलिस के सामने भीड़ ने दफ्तर फूंकने और व्यापारियों पर हमले की कोशिश की। पुलिस ने दफ्तर तो सील कर दिया पर सीसीटीवी साक्ष्य के बाद भी भीड़ पर कार्रवाई नहीं की। डीआईजी ने एसएसपी को हमले के साथ ही बारादरी इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच कराने का भी आदेश दिया है।
उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के कई पदाधिकारी गुरुवार पूर्वाह्न 11 बजे डीआईजी राजेश कुमार पांडेय से मिले। महानगर अध्यक्ष शोभित सक्सेना और जिलाध्यक्ष राजकुमार राजपूत ने बताया कि मतदान के दिन भारी संख्या में विपक्षी दलों से जुड़े लोगों की भीड़ रामवाटिका कॉलोनी स्थित व्यापारी नेता आशू अग्रवाल के घर पहुंची थी। आरोप था कि बेसमेंट में बने भाजपा आईटी सेल के दफ्तर से लोगों को फोन करके भाजपा के पक्ष में मतदान का बरगलाया जा रहा है। यह आरोप पूरी तरह गलत थे क्योंकि वहां केवल भाजपा के लोगों से ही संपर्क कर मतदान प्रतिशत बढ़ाने को प्रेरित किया जा रहा था। बावजूद पुलिस-प्रशासन की किसी कार्रवाई पर व्यापारियों को आपत्ति नहीं है, जांच में सब साफ हो जाएगा। अफसोस इस बात का है कि भीड़ ने बारादरी इंस्पेक्टर और पुलिस के सामने व्यापारी के घर को आग लगाने, व्यापारियों पर हमले और कार से खींचने की कोशिश की। पुलिस मूकदर्शक बनी रही और बाद में भी उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी। वे लोग थाने पहुंचे तो इंस्पेक्टर का कहना था कि बिना अफसरों के निर्देश के वो रिपोर्ट नहीं लिख सकते। व्यापारियों ने घटनाक्रम से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो भी उन्हें सौंपे पर उन्होंने इसे दरकिनार कर दिया। व्यापारियों ने करीब दो सौ लोगों की भीड़ पर रिपोर्ट कराने और इंस्पेक्टर पर कार्रवाई की मांग की। डीआईजी ने व्यापारियों को आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण की जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। डीआईजी से मिलने वालों में अमरजीत सिंह, मनोज अरोड़ा, दानिश जमाल, शोएब खान और गुरमीत सिंह आदि कई व्यापारी शामिल थे।
व्यापारियों की शिकायत एसएसपी को भेज दी गई है। उन्हीं के स्तर से भीड़ पर लगे आरोपों और इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। - राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी