बरेली। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के नोटिस को हल्के में लेकर आईवीआरआई प्रशासन ने दूर राज्यों से आए खिलाड़ियों को मुसीबत में डाल दिया है। बताते हैं कि संयुक्त कर्मचारी परिषद की तरफ से करीब पंद्रह दिन पहले एक मेल हुआ था, इसमें हड़ताल के दौरान किसी तरह के आयोजन न कराए जाने के लिए कहा गया था लेकिन आईवीआरआई के अधिकारियों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। सोमवार को जब कर्मचारियों ने इंटर जोनल खेलकूद प्रतियोगिता को विरोध करते हुए उसे बंद कराया तो अधिकारियों ने इस आयोजन में बाधा पैदा कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई भी नहीं की।
इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) के देशभर के तमाम राज्य में बने संस्थानों के करीब चार सौ खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए काफी समय से तैयारी कर रहे हैं। इस कंपटीशन में उन्हीं खिलाड़ियों को मौका दिया गया था, जो अपने जोन में विजेता रहे हैं। आईवीआरआई में इस कार्यक्रम को कराने की तैयारी काफी समय से चल रही है। इधर आईवीआरआई और सीएआरआई के कर्मचारी वेतन और भत्तों के मुद्दों को लेकर काफी समय से आंदोलनरत थे। शनिवार से वे पेन डाउन हड़ताल पर हैं। संयुक्त कर्मचारी परिषद के संस्थान सचिव शैलेंद्र शाह का कहना है कि पंद्रह दिन पहले ही आईवीआरआई के अधिकारियों को मेल दिया था। इसमें खेलकूद प्रतियोगिता न कराए जाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद संस्थान के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और प्रतियोगिता आयोजन को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया। जबकि सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने इस प्रतियोगिता को होने नहीं दिया और संस्थान के अफसर भी इसे रोक नहीं सके।
प्रतियोगिता आयोजन के नाम लाखों के बजट बर्बाद
इस प्रतियोगिता में अंडमान निकोबार सहित तमाम दूर राज्यों से करीब चार सौ खिलाड़ी शिरकत करने आए हैं। बताते हैं कि प्रत्येक खिलाड़ी के लिए 3500 रुपये की किट ली गई है। खिलाड़ी और उनके साथ आए कोच के टीए, डीए और होटल में ठहरने व खाने का पेमेंट भी सरकारी रकम से होना है। इसके अलावा आयोजन संबंधी टैंट अन्य खर्च भी हुए हैं। जबकि कर्मचारियों के विरोध से बजट बर्बाद हो गया है।
‘संस्थान के कर्मचारियों के विरोध से प्रतियोगिताएं नहीं हो सकी हैं। इस प्रतियोगिता का न कराने का मेल दिए जाने की बात पता चली है लेकिन स्टाफ का कहना है कि इसमें शामिल होने वाले खिलाड़ियों ने काफी पहले ही ट्रेन के रिजर्वेशन करा लिए थे। इस मामले में कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होनी है या नहीं, यह अभी तय नहीं है। निदेशक के वापस लौटने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।’
- डॉ. वीके गुप्ता, कार्यवाहक निदेशक, आईवीआरआई