बरेली। रक्षा बंधन की तरह ही भैया दूज भी भाई-बहन के अटूट बंधन और स्नेह का पर्व है। गोवर्धन पूजा के अगले दिन यानी शुक्रवार को भैया दूज मनाई जाएगी। बहनें भाई को पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार तिलक कर उनकी दीर्घायु की कामना करेंगी। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन विशेष सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य पं. मुकेश मिश्रा ने बताया कि पंच पर्व की शृंखला का अंतिम पर्व भैया दूज है। 9 नवम्बर शुक्रवार को भाई दूज मनाई जाएगी। बताया कि अबकी बार सर्वार्थ सिद्ध योग होने के कारण भैयादूज के लिए अति विशेष है। सर्वार्थ सिद्धि योग में भैयादूज मनाना भाई-बहन के प्रेम को बढ़ाने वाला और दीर्घायु की मनोकामना पूरी करने वाला होगा। सर्वार्थ सिद्धियोग सुबह 6:39 से रात 8:34 बजे तक रहेगा, लेकिन दिन में 10:40 से 12:02 तक राहुकाल रहेगा, जो भैयादूज के लिए शुभ समय नहीं है। ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के अनुसार भैयादूज को शास्त्रों में स्नेह पर्व कहा गया है। इस दिन भगवान चित्रगुप्त की भी पूजा की जाती है। इस दिन यम के दस नामों का भी स्मरण करना श्रेयस्कर रहता है।
यूं करें पूजन
नौ ग्रहों के प्रतीक स्वरूप नौ दीप प्रज्वलित कर ईश्वर की आराधना कर मनोकामना करें। भैयादूज के दिन बहनें भाई को कुमकुम का तिलक कर साथ में अपने हाथों से बनाया भोजन कराएं। मान्यता है कि जो बहनें भाई को पान खिलाती है उनका सौभाग्य अखंड रहता है और भाई को यमलोक का भय नहीं रहता। घर के दक्षिण दिशा में तेल का दीपक जलाने से भाई-बहन के प्रेम और सौहार्द में वृद्धि होती है।
शुभ मुहूर्त
सर्वार्थ सिद्धियोग - सुबह 6:39 से रात 8:34 बजे तक
पूजन का समय - सुबह 7:58 से 10:40 बजे तक
दोपहर 12:03 से 1:24 बजे तक
रात 8:36 से 10:24 बजे तक
राहु काल सुबह 10:40 से दोपहर 12:02 बजे तक
नोट- राहुकाल का समय भैयादूज मनाने के लिए शुभ नहीं है।