बरेली। कागजी कारोबार करने और 90.11 करोड़ रुपये की केंद्रीय माल और सेवाकर (सीजीएसटी) की चोरी के आरोप में फंसे तीनों व्यापारी के वकीलों ने लखनऊ स्थित न्यायालय में जमानत कराने के लिए सोमवार को पैरवी की लेकिन बाद में पता चला कि कागजों में कु छ कमी है तब मामला न्यायालय तक नहीं पहुंच पाया। अब अगले सप्ताह फिर से जमानत कराने के प्रयास होंगे।
पिछले दिनों लखनऊ से आई सीजीएसटी इंटेलीजेंस टीम ने जयदीप अग्रवाल, रचिन और सुनील गुप्ता के निवास और उनके कारोबारी ठिकानों पर छापा मारा था। टीम ने इन स्थानों पर ऐसे अभिलेख बरामद किए जिनसे प्रमाणित हो गया कि तीनों व्यापारी कागजी कारोबार कर रहे थे। इसकी आड़ में करोड़ों रुपयों के टैक्स की हेराफेरी भी की गई। एडीजी राजेंद्र सिंह के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए। विभाग ने कथित कारोबार और ट्रांजेक्शन का आकलन कराया तब तीनों व्यापारियों की फर्मों पर 90.11 करोड़ रुपये का टैक्स आरोपित किया गया। इसके साथ ही, विभाग ने इन तीनों को दो सप्ताह की रिमांड पर लिया और फिर टैक्स चोरी के आरोप में जेल भेज दिया। सोमवार को उनके वकीलों ने उनकी जमानत के प्रयास किए। जो कागजी कमी के चलते पूरे नहीं हो सके। अब अगले सप्ताह ही कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाया जाएगा।