टुल्ला: स्टार्टअप नहीं स्टाप बैक
पोल्ट्री फार्म खोलकर पछता रहे ईमानदार अफसर के बेटे ने अमर उजाला को बोला- थैंक्स
मचा हड़कंप तो दौड़े अफसर
25 दिन बाद लगा बिजली मीटर
घूस देकर भी बिजली कनेक्शन के बजाय एफआईआर झेल रहे युवा उद्यमी गाजी खां को मिली राहत
उद्योग व्यापार मंडल ने एक्सईएन को घेरा
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। घूस न मिलने बिजली विभाग के इंजीनियरों ने विजिलेंस से छापा पड़वाकर युवा उद्यमी के नये उद्योग को चलने से पहले ही बंद करा दिया। इसके बाद यह युवा उद्यमी पिछले 25 दिनों से पुलिस-प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों की चौखट पर चप्पलें घिस रहा था। मंगलवार को अमर उजाला में बिजली विभाग के अफसरों की मनमानी और भ्रष्टाचार के संबंध में खबर छपने के बाद ऊपर से नीचे तक हड़कंप मचा। ऊपर से हड़काया गया तो अफसर दौड़ पड़े और देर शाम मीटर लगवा कर युवा उद्यमी का कनेक्शन चालू करा दिया गया।
भोजीपुरा के एक गांव में उद्यमी गाजी खां ने पोल्ट्री फार्म खोलने के लिए बैंक से लोन लिया था। पोल्ट्री फार्म बनकर तैयार हुआ तो गाजी खां ने बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया, इलाके के जेई ने कनेक्शन दिलाने के नाम पर गाजी खां से अच्छी-खासी रकम बतौर घूस ले ली, लेकिन जेई से ऊपर के अधिकारी घूस न मिलने पर खफा हो गए। जेई ने घूस लेकर गाजी खां के पोल्ट्री फार्म के लिए 30 किलोवाट के कनेक्शन की लाइन लाइनमैन भोला से जुड़वा दी, लेकिन घूस में हिस्सा न मिलने से नाराज एसडीओ बहेड़ी संजय कनौजिया ने विजिलेंस टीम बुलाकर खुद कनेक्शन पकड़ लिया। बिना मीटर चालू हुई लाइन मिलने पर मुकदमा भी दर्ज करा दिया। आरोप है कि एसडीओ के नेतृत्व पहुंची चेकिंग टीम ने मुकदमा दर्ज न कराने की एवज में गाजी खां से तीन लाख रुपये मांगे थे। प्रांतीय महामंत्री उद्योग व्यापार मंडल राजेंद्र गुप्ता तक फरियाद पहुुंची तब उन्होंने सभी अफसरों ने अलग अलग बात कर पक्ष रखा। डीएम और एसपी से भी गुहार लगाई, लेकिन बिजली अफसर टस से मस नहीं हुए।
मंगलवार को अमर उजाला में बिजली विभाग के भ्रष्टाचार की यह खबर छपी तो अफसरों में हड़कंप मच गया। उधर, बिजली अफसरों के रवैये से नाराज व्यापार मंडल ने मंगलवार दोपहर में अधिशासी अभियंता ग्रामीण एलबी सिंह कार्यालय पर हल्ला बोल दिया। तीन घंटे तक कनेक्शन जोड़ने और घूसखोरी में शामिल लोगों पर कार्रवाई कराने के लिए व्यापारी नेता दबाव बनाते रहे। वरिष्ठ अफसरों की गैर मौजूदगी में किसी तरह अधिशासी अभियंता पीए माेंगा ने मध्यस्ता कर समाधान निकाला। बातचीत में तय हुआ कि असेसमेंट का चेक से भुगतान कर दिया जाए। व्यापारी नेता राजेंद्र गुप्ता और दुर्गेश कुमार ने कहा कि चेक से भुगतान सशर्त होगा। प्रभावित पक्ष और व्यापारी नेताओं ने कहा कि जांच में विभागीय स्टाफ दोषी पाया गया तो जमा धनराशि वापस होगी। माेंगा ने कहा आंतरिक जांच पहले से चल रही है और डीएम ने भी सप्ताह भर में आख्या मांगी है। इसलिए पूरा न्याय होगा। इस आश्वासन के बाद देर शाम चेक से भुगतान किया गया और रात में ही मीटर लगाकर लाइन चालू कराई गई। इसके साथ ही बंद उद्योग चल पड़ा।