एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सर्वर से 2004 से पहले का लाखों छात्रों की डिग्री और मार्कशीट का डाटा गायब हो गया है। इस वजह से ऑनलाइन मार्कशीट और डिग्री देने की योजना शुरू होने से पहले ही ठप हो गई है। एजेंसी ने विश्वविद्यालय से पुराना डाटा मांगा है मगर विश्वविद्यालय ने डाटा उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर दिए। माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का डाटा सॉफ्ट कॉपी में नहीं बना पाएगा। फिलहाल छात्रों को डुप्लीकेट मार्कशीट हाथ से बनाकर देनी पड़ रही है।
यूजीसी की पहल पर सभी विश्वविद्यालयों को नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (नेड) से जोड़ा जा रहा है। इस सिस्टम में एक ही वेबसाइट पर सभी विश्वविद्यालयों के रिजल्ट और डिग्री का डाटा अपलोड रहेगा। छात्र यहां से कभी भी अपनी डुप्लीकेट मार्कशीट और डिग्री निकाल सकेगा। विश्वविद्यालय पिछले एक साल से इस कवायद में जुटा है। हालांकि पहले इसमें कमाई का पेच फंसा था। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना था कि अगर डाटा ऑनलाइन कर दिया तो विश्वविद्यालय की आमदनी का एक बड़ा जरिया बंद हो जाएगा। इसके लिए रास्ता खोजा जा रहा था कि अब डाटा का अड़ंगा लग गया। करीब चार साल पहले विश्वविद्यालय के सर्वर से 2004 तक के सारे छात्रों का डाटा डिलीट कर दिया गया। इसके बाद यह मामला दबाए रखा गया। यह भी पता नहीं चला कि डाटा किसने डिलीट किया। अब डुप्लीकेट मार्कशीट भी हाथ से बनाकर दी जा रही हैं। अपना प्रजेंटेशन देने आई एजेंसी ने विश्वविद्यालय से पुराना डाटा मांगा है मगर विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि पुराना डाटा सॉफ्ट कॉपी में करना मुश्किल है। अगर ऑनलाइन मार्कशीट और डिग्री की सुविधा मिलेगी तो 2004 के बाद वाले छात्रों को ही मिल पाएगी। अब एजेंसी को दोबारा बुलाया गया है।
एजेंसी ने पुराना डाटा भी मांगा है, लेकिन विश्वविद्यालय में पुराना डाटा सर्वर पर नहीं है। हार्ड कॉपी के डाटा को सॉफ्ट में तब्दील करना आसान भी नहीं है। एजेंसी से बात करके कोई रास्ता निकालेंगे। एजेंसी को दोबारा बुलाया है।
-प्रो. अनिल कुमार शुक्ला, कुलपति