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शादी में जरूर आना वाले राहत अपने गांव आए

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फख्र है शकील साहब के जिले का हूं: राहत अली खां
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फिल्म शादी में जरूर आना के कास्टिंग डायरेक्टर राहत पहुंचे गांव
फोटो-19 बीडीएन-31,33
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
उझानी के गांव मानकपुर निवासी राहत अली खां ने छोटे से रंगमंच से शुरू की अपनी कला के जरिए मायानगरी में स्थान बना लिया है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म शादी में जरूर आना में वह कास्टिंग डायरेक्टर हैं। फिल्म की सफलता से उन्हें तीन फिल्में और मिल गईं हैं। उनका कहना है कि उन्हें फख्र है कि वह शकील साहब के जिले से हैं।
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रविवार को राहत अली यहां अमर उजाला दफ्तर में पहुंचे तो उन्होंने रंगमंच से जुड़े सवालों पर बेबाकी से बातचीत की। बोले- वह चाहे किसी स्तर पर पहुंच जाएं मगर अपने गृह जनपद के बेहद करीब रहेंगे। इसी ने उन्हें मायानगरी में पहचान दी है। राहत अली खां ने बताया कि उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से की। बचपन में उन्हें नाटक करने और कहानियां पढ़ने का शौक था, सो स्कूलों में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। जब वह समझदार हुए तो उन्हेें लगा कि रंगमंच के जरिए जिले के नाम रोशन किया जा सकता है और वह वर्ष 2005 में वह मुंबई चले गए। कुछ दिन अपने मित्रों के साथ रहे। समय बीतने के साथ ही उन्हें वो हासिल भी होने लगा जिसके लिए वह घर से निकले। उनकी पहली मुलाकात निर्माता रत्ना सिंह से हुई। उन्हें खुद के बारे में बताया तो उन्होंने अपने एक धारावाहिक बाबुल का आंगन छूटे न में बतौर कास्टिंग डायरेक्टर और सहायक निर्देशक के काम का मौका दिया। इसके बाद आगे बढ़ने का मौका मिल गया। उन्होंने प्रसिद्ध धारावाहिक उतरन, दो सहेलियां, बाबुल का आंगन झूठे न, परवरिश, कुबूल है समेत कई धारावाहिक में विभिन्न रोल में काम किया है।
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