जाट रेजिमेंट अब तकनीकी लिहाज से भी मजबूत हो रही है। जाट रेजिमेंट सेंटर के लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी के मुताबिक रेजिमेंट में भर्ती होने वाले रंगरूटों को अब लड़ाई के साथ तकनीकी ट्रेनिंग भी दी जा रही है। सैनिकों को भी बेसिक मिलिट्री के अलावा सर्विलांस डिवाइस और दूसरे आधुनिक उपकरणों को इस्तेमाल करने का अभ्यस्त बनाया जा रहा है। इससे आने वाले समय में सेना की ताकत कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।
जाट रेजिमेंट के 222वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए एसके सैनी ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि जाट रेजिमेंट में दूसरी रेजिमेंटों की तुलना में ज्यादा सैनिक है। हमारी जितनी क्षमता है, उससे ज्यादा रंगरूटों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संसाधनाें को भी बढ़ाया गया है। जाट सेंटर लगातार आगे बढ़ रहा है, इसी के चलते रेजिमेंट ने अपने रंगरूटों को प्रशिक्षण देने के तरीकों में भी बदलाव किया है। मिलिट्री की बेसिक ट्रेनिंग के साथ जवानों को तकनीक का इस्तेमाल भी सिखाया जा रहा है। पहले हमारे आपरेशन दिन में ही होते थे लेकिन अब हमारे जवान रात में भी मोर्चे पर डटे हुए हैं। सर्विलांस डिवाइस आ गई हैं, जिससे काम आसान हो गया है। इनके साथ प्रैक्टिस कर रहे जवानों को एलओसी से लेकर सियाचिन और नार्थ ईस्ट में काफी फायदा मिल रहा है। जनरल ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में कदम रखने के बावजूद हमारा सबसे पहला टास्क दुश्मनों को खत्म करने का है जो बिल्कुल भी नहीं बदला है।
युवा सेना को सिर्फ नौकरी न समझें
लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने कहा कि सुविधाएं बढ़ने और सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद युवाओं में सेना की ओर रुझान बढ़ा है, लेकिन युवाओं को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि आर्मी सिर्फ एक नौकरी नहीं बल्कि जीवन का एक हिस्सा है। उन्होंने बताया कि वह बरेली में दूसरी बार आए हैं। इससे पहले वह सीओ रहने के दौरान तीन हफ्ते यहां ठहरे थे।