ेबरेली। शासन के निर्देश हैं कि शैक्षिक सत्र में 200 दिन कक्षाएं चलें, अगर इतना न हो तो कम से कम 180 दिन कक्षाएं जरूर चलनी चाहिए, लेकिन एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के हालात इससे बिल्कुल इतर हैं। 180 दिन तो दूर, इस बार 100 दिन भी कक्षा संचालन संभव नहीं लग रहा है। विश्वविद्यालय के शैक्षिक कैलेंडर में इस बार 220 दिन दिए गए है, मगर हालात यह हैं कि अभी तक यूजी और पीजी के प्रवेश चल रहे हैं। ऐसे में 75 फीसदी उपस्थिति और सिलेबस पूरा कराना बड़ी चुनौती है।
मौजूदा स्थिति को देखें तो नियमित रूप से कक्षाएं बीस सितंबर के बाद ही चल पाएंगी। दूसरी तरफ 18 से 29 सितंबर तक इंप्रूवमेंट परीक्षाएं हाेंगी। विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षाएं मार्च में होती हैं। उससे पहले कई प्रोफेशनल कोर्स की परीक्षाएं भी करानी होती हैं। ऐसे में पांच महीनों में बमुश्किल 100 दिन ही कक्षाएं नियमित रूप से चल पाएंगी। इतने कम समय में सिलेबस पूरा कराना सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अगर कॉलेज सहयोग करेंगे तो अतिरिक्त कक्षाएं लगवाकर सिलेबस कवर करा लिया जाएगा।
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इस बार प्रवेश प्रक्रिया थोड़ी विलंब से चल रही है, इसलिए सत्र पूरा कराना चुनौती है। कॉलेजों को निर्देश दिए जाएंगे कि अतिरिक्त कक्षाएं लगवाकर सिलेबस पूरा कराएं। कॉलेज सहयोग करेंगे तो सिलेबस कवर हो जाएगा। - प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला, कुलपति, एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय
कुछ दिन बाद इंप्रूवमेंट परीक्षा हैं, प्रवेश प्रक्रिया में विलंब होने के कारण सिलेबस पूरा कराना सबसे बड़ी चुनौती है। जितना हमारे स्तर से होगा हम सहयोग करेंगे। अब शिक्षक रविवार को तो पढ़ाने नहीं आ सकता। जो दिन बचे हैं, उन्हीं में सिलेबस पूरा कराएंगे। -डॉ. अजय कुमार शर्मा, प्राचार्य, बरेली कॉलेज
द्वितीय और फाइनल की कक्षाएं शुरू करा दी हैं। रही बात यूजी और पीजी प्रथम की, तो प्रवेश ही विलंब से हो रहे हैं, ऐसे में सत्र में विलंब होगा ही। फिलहाल, सिलेबस पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। अगर सिलेबस पूरा नहीं होता है तो इसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय ही होगा। -डॉ. ममता बंसल, प्राचार्य, वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय
प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय के हाथ में है। अगर समय से प्रवेश हो गए होते तो कक्षाएं भी समय से संचालित हो जातीं। अब इंप्रूवमेंट परीक्षाएं, फिर त्योहार के अवकाश, ऐसे में सत्र पूरा होना संभव ही नहीं है। जितना संभव होगा सिलेबस पूरा कराया जाएगा। -डॉ. कुहू दत्त, प्राचार्य, कन्या महाविद्यालय भूड़