बरेली। बरेली कॉलेज सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों से पिछड़ने लगा है। एडमिशन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया बंद होने में अब सिर्फ दस दिन बचे हैं, लेकिन पिछले साल के मुकाबले आवेदकों की संख्या इस बार करीब आधे तक ही पहुंच पाई है। स्नातक, परास्नातक और एलएलबी के लिए बरेली कॉलेज में अब तक करीब साढ़े 12 हजार पंजीकरण ही हुए हैं, जबकि पिछले वर्षों में अब तक यह संख्या बीस से पच्चीस हजार के बीच रहती थी।
ब्रिटिश शासनकाल में सन 1837 में बरेली कॉलेज की स्थापना हुई थी। 57 विद्यार्थियों के साथ शुरू हुआ यह कॉलेज हमेशा ही युवाओं की पसंद रहा है। बरेली ही नहीं आसपास के जिलो में भी युवाओं की पहली पसंद बरेली कॉलेज ही है। इसके चलते हर साल ही यहां एडमिशन के लिए मारामारी रहती है। कई बार तो शासन ने सांध्यकालीन कक्षाएं चलाने की भी अनुमति दी है। मगर सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के दौर में युवाओं के बीच अब इस कॉलेज का क्रेज कम हो रहा है। स्नातक, परास्नातक और एलएलबी में अब तक सिर्फ साढ़े 12 हजार पंजीकरण हुए हैं। पंजीकरण प्रक्रिया इतनी धीमी है कि प्रवेश समिति से जुड़े लोग भी यह आंकड़ा बस 14 हजार तक पहुंचने की उम्मीद जता रहे हैं जबकि पूर्व के वर्षों में यह आंकड़ा 20 हजार से अधिक ही रहता था।
पढ़ाई घटी विवाद बढ़े
युवाआें के बीच लोकप्रिय बरेली कॉलेज अब हंगामा और विवादों के लिए भी जाना जाता है। पिछले शैक्षिक सत्र में कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी का विवाद, कर्मचारी विवाद, एलएलबी एडमिशन पर विवाद और निर्माण-खरीदारी आदि के घोटालों को लेकर विवादों में घिरा रहा। घोटाले को लेकर रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई और अब मामले की विवेचना चल रही है। इन सब विवादों के चलते पिछले शैक्षिक सत्र में काफी दिन पढ़ाई चौपट रही।
14 जून तक कराएं पंजीकरण
बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन में पंजीकरण की तिथि बढ़ा दी है। प्रवेश लेने के इच्छुक छात्र-छात्राएं 14 जून तक बरेली कॉलेज की वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कर सकते हैं।
अब तक पंजीकरण
स्नातक : 10,000
परास्नातक : 1500
एलएलबी : 1000
‘स्नातक, परास्नातक और एलएलबी में अब तक करीब 12,500 पंजीकरण हुए हैं। पिछले वर्षों में यह आंकड़ा 20 हजार को पार कर जाता था। मगर इस बार यह संख्या इतनी कम क्यों है, समझ में नहीं आ रहा है।’
- डॉ. अनुराग मोहन, मुख्य प्रवेश समन्वयक
‘सेल्फ फाइनेंस कॉलेज ने राजकीय कॉलेज की कमर तोड़कर रख दी है। तमाम कॉलेज बढ़ रहे हैं और छात्र-छात्राएं उनमें बंट रहे हैं। रही बात शिक्षा गुणवत्ता की. तो जब क्लास में बच्चे नहीं होंगे तो शिक्षक का मन भी पढ़ाने में नहीं लगता।’
- डॉ. सोमेश यादव, पूर्व प्राचार्य बरेली कॉलेज