बरेली। जमीनों के घोटाले में अफसरों की भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले उन्होंने नवाबगंज जमीन घोटाले की फाइल दबाने की कोशिश की और अब रिकार्ड रूम की उन खामियों की रिपोर्ट को भी दबाए बैठे हैं जो खुद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने फरवरी में जांच के दौरान पकड़ी थीं। अब कमिश्नर ने मातहत अधिकारियों पर इस बात पर सख्त नाराजगी जताई है कि तीन महीने गुजर जाने के बाद भी उन्हें अब तक रिपोर्ट नहीं दी गई है।
राजस्व अभिलेखगार में खतौनियों को खुर्द-बुर्द करने और रिकार्ड की नकल लेने के बहाने उन्हें रिकार्ड रूम के बाहर ले जाने जैसे कई गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। ऐसी ही शिकायतों के बीच कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने फरवरी में रिकार्ड रूम में पहुंचकर वहां की व्यवस्था और अभिलेखों के रखरखाव को चेक किया था। कमिश्नर ने खतौनी और जिल्दों की हालत अच्छी न मिलने पर नाराजगी जताई थी और इस बात पर भी नाखुश हुए थे कि उन्हें तमाम गड़बड़ियों के बाद भी महफूज रखने के इंतजाम भी नहीं हो रहे हैं। रिकार्ड रूम में पुरानी वायरिंग में स्पार्किंग होने से रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई थी। कमिश्नर ने रिकार्ड रूम के स्टाफ को कड़ी हिदायत दी थी कि वह अनावश्यक ट्यूब लाइट या बल्ब न जलाएं। इस जांच के बाद प्रशासन को रिपोर्ट तैयार करनी थी। इसमें यह भी बताया जाना था कि रिकार्ड रूम को व्यवस्थाओं को दुरस्त करने के लिए क्या इंतजाम हुए हैं। मगर कलक्ट्रेट के अधिकारियों ने कमिश्नर की निरीक्षण रिपोर्ट को भी दबा लिया। अब इसके पीछे चुनावी व्यस्तता का जिक्र किया जा रहा है।
कमिश्नर ने एडीएम सिटी से पूछा था..क्यों दर्ज नहीं हुए घोटाले की रिपोर्ट
नवाबगंज जमीन घोटाले की जांच भी फरवरी में पूरी हो गई थी। इसमें डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने भी घोटालेबाजों पर एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति भी दे दी थी। इसके बावजूद अधिकारियों ने रिपोर्ट दर्ज कराने में लापरवाही दिखाई थी। कुछ रोज पहले कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने एडीएम सिटी महेंद्र कुमार को फोन करके पूछा था कि इस मामले में अब तक रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं हुई है। कमिश्नर के आदेश के बाद प्रशासन ने रविवार को नौ आरोपियों पर केस दर्ज करा दिया।
मैंने चुनाव से पहले रिकार्ड रूम का निरीक्षण किया था, लेकिन अब तक निरीक्षण के बिंदु कलक्ट्रेट के अधिकारियों ने तैयार करके नहीं भेजे हैं। इसलिए उन्हें कड़े निर्देश दिए गए हैं। -रणवीर प्रसाद, कमिश्नर