बरेली। लोकसभा चुनाव- 2014 में बरेली संसदीय क्षेत्र में दांव लगाने आए छोटे दलों में आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी थी। बरेली के साथ इस पार्टी ने आंवला में भी अपना प्रत्याशी खड़ा किया था, लेकिन दोनों सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों को जो वोट मिले, पार्टी ने शायद उन पर गौर करते हुए आगे के लिए अपनी संभावनाओं को खत्म मान लिया। इस बार दोनों सीटों पर इन पार्टियों के पास अभी तक न कोई उम्मीदवार है न उसके खेमे में किसी किस्म की कोई चुनावी हलचल दिखाई दे रही है।
पिछले लोकसभा चुनाव में बरेली सीट पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सुनील कुमार थे जिन्हें भरपूर ताकत लगाने के बावजूद सिर्फ 3691 वोट मिले थे। आंवला में पार्टी के उम्मीदवार नरेश सिंह सोलंकी इतने भी वोट हासिल नहीं कर पाए। उनकी कहानी सिर्फ 2299 वोटों में निपट गई। यह हालत तब थी जब पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने यहां कई दिन तक डेरा डाले रखा था। अन्ना हजारे के आंदोलन से निकली इस पार्टी के पास दावों और वादों की भी कमी नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद जमानत बचाना तो दूर, प्रमुख दलों के बीच यह पार्टी कोई सम्मानजनक स्कोर तक हासिल नहीं कर पाई। इस बार लोकसभा चुनाव में यह पार्टी पूरी तरह खामोश है। बरेली में इस पार्टी को संभालने वाले नवनीत अग्रवाल बसपा में जा चुके हैं और नैनीताल सीट से उम्मीदवार भी बन गए हैं। अभी तक इस पार्टी की ओर से चुनाव के संबंध में एक बयान तक जारी नहीं हुआ है। पार्टी के लोग इतना जरूर कह रहे हैं कि पार्टी ने पूरा जोर दिल्ली में लगा रखा है।
पीस पार्टी भी नहीं उतरेगी इस चुनाव में!
बरेली। आम आदमी पार्टी की तरह पीस पार्टी भी इस बार महासंग्राम की तस्वीर में कहीं नहीं दिख रही। यह पार्टी यहां पिछले कई दौर के विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। बताया जा रहा है कि इस पार्टी का शिवपाल सिंह की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से गठबंधन भी हुआ है, लेकिन कोई घोषणा अभी तक नहीं की गई है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बरेली में अपने उम्मीदवार के तौर पर नवाबगंज नगर पालिका की अध्यक्ष शहला ताहिर की बेटी समन के नाम की घोषणा कर चुकी है। बताया जा रहा है कि आंवला में भी जल्द उम्मीदवार घोषित करने की तैयारी है। आंवला में दो लोगों ने पार्टी के टिकट के लिए दावेदारी भी की है। पीस पार्टी की ओर से यह जरूर कहा जा रहा है कि उसने आंवला की सीट शिवपाल सिंह से मांगी है, लेकिन प्रसपा उसे यह सीट देने को तैयार नहीं है। लिहाजा यह साफ ही है कि इस बार लोकसभा चुनाव में पीस पार्टी बरेली जिले में नहीं दिखाई देगी।
आईएमसी खामोश और मौलाना तौकीर भी
बरेली की स्थानीय पार्टी इत्तेहादे मिल्लत कौंसिल यानी आईएमसी और उसके मुखिया मौलाना तौकीर रजा खां की खामोशी को राजनीतिक हल्कों में इस बार कुछ आश्चर्य से देखा जा रहा है। पिछली बार इस पार्टी ने बसपा को समर्थन दिया था, लेकिन इस बार किसी दल को समर्थन की भी घोषणा नहीं की है, न किसी बड़े दल की ओर से इस पार्टी के नेताओं से संपर्क करने की कोई खबर है। आईएमसी सौदागरान के पते पर चुनाव आयोग में पंजीकृत है। कई विधानसभा चुनावों में यह दल लड़ता रहा है। इस दल के टिकट पर एक विधायक भी जीत चुका है। हालांकि विधायक बनने के बाद दल के नेतृत्व से मतभेद होने पर उसने अपनी आदत के मुताबिक आईएमसी छोड़कर सपा ज्वाइन कर ली थी। दल के संस्थापकों की ओर से एक अलग पार्टी ‘हम’ भी बनाई थी। उसमें संभल के रहने वाले एक महात्मा नेतृत्वकर्ता बनाए गए। मगर वह बाद में वह खुद ही कांग्रेस में शामिल होकर उसके चुनाव चिन्ह पर पिछला लोकसभा चुनाव लड़ने उतर गए थे। इससे ‘हम’ का अस्तित्व खत्म हो गया।
दर्जन भर और भी दल इस चुनाव में नदारद
इन छोटे दलों के अलावा इस बार मजलिस इत्तहादुल मुसलमीन, अपना दल (कृष्णा पटेल), भारतीय नौजवान इंक्लाब पार्टी, भारतीय कृषक दल, भारतीय विकास पार्टी, नैतिक पार्टी, जवान किसान मोर्चा, अखिल भारतीय हिंदू महासभा जैसे दूसरे छोटे दलों की भी इस बार चुनाव में कोई आमद होती नहीं दिख रही। इन सभी दलों ने पिछले चुनाव में बरेली या आंवला सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।
30 से ज्यादा पंजीकृत दल भी बरेली में गुमशुदा
बरेली। चुनाव आयोग में पंजीकृत 30 से ज्यादा पार्टी भी रुहेलखंड की राजनीति से पल्ला छुड़ा चुकी हैं। इनमें कई की तो चुनाव आयोग से मान्यता भी खत्म हो चुकी है।
चुनाव आयोग के रिकार्ड में सैलानी रोड पुराना शहर के काजी टोला की संकरी गलियों में राष्ट्रीय आवामी दल के मुख्यालय के नाम से दर्ज है। अब आवामी दल का कोई नामोनिशां नहीं दिख रहा। एक अधिवक्ता ने खुद को इस दल का संस्थापक बताया। बोले- वर्ष 2002 में उन्होंने पंजीकरण चुनाव आयोग में कराया था। 2005 तक उनकर आवामी दल चला, मगर उसके बाद वह खुद मुस्लिम लीग में शामिल हो गए। आवामी दल का चुनाव आयोग में पंजीकरण है या नहीं, अफसरों को यह देखने तक की फुर्सत नहीं है। इज्जतनगर में एकता पार्टी का कार्यालय यहां की डिफेंस कालोनी के पते पर पंजीकृत था। इसी पते पर भारतीय हिंद एकता दल भी पंजीकृत कराया गया। मगर, कुछ एक धरना-प्रदर्शनों के अलावा इस दल के नेताओं में कहीं कोई धमक नहीं दिखी। इन दलों का जनाधार भी न के बराबर रहा। इज्जतनगर के ही बगल के आलोकनगर में भी राष्ट्रीय बहुजन एकता पार्टी के नाम से एक दल पंजीकृत है। शहर के मतदाता इस पार्टी का नाम तक नहीं जानते।
चुनाव आयोग में पंजीकृत कुछ राजनीतिक दल
1- पीलीभीत में आदर्श गुरुकुल शाही की अखिल भारतीय राजायो सभा राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत है। मगर, चुनाव से गायब है।
2- शाहजहांपुर में डॉ. लोहिया कालोनी के पते पर अंबेडकर प्रगतिशील रिपब्लिक दल और जलालनगर में छोटी लाइन के सामने एकता क्रांति दल का प्रदेश मुख्यालय है। शाहजहांपुर के बंडा कस्बे के मोहल्ला गायत्री नगर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय आजाद पार्टी का मुख्यालय है।
3- बदायूं में आर्य समाज चौक स्थित शांति होम्योपैथिक स्टोर के पते पर अंबेडकर क्रांति दल का पंजीकरण आयोग में था। यहीं किसान समाज मोर्चा का मुख्यालय गुन्नौर तहसील के बिचौलिया भूड़ गांव में है। बदायूं के रुदायन से नेशनल पार्टी भी संचालित हो रही है।
4- लखीमपुर खीरी से किसान समाज पार्टी (एस) निघासन तहसील के झिन्नापूर्व के पते पर है। भीरा खीरी के एड्रेस पर राष्ट्रीय समाज सेवक दल का पंजीकरण है। जनसड़ गांव से श्रेष्ठतम राष्ट्र पार्टी चलती है। मोहम्मदी के मोहल्ला इस्लामाबाद से सवर्ण महासभा भी राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत है।
चुनाव अयोग में जो राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, उनके प्रत्याशी अगर नामांकन कराएंगे तो चुनाव प्रक्रिया के तहत उनको शामिल किया जाएगा। जिन दलों की मान्यता खत्म हो चुकी है, वह चुनाव प्रक्रिया से बाहर होंगे। रामसेवक द्विवेदी, अपर जिला निर्वाचन अधिकारी बरेली