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मताधिकार पाने को 48 घंटे बाकी प्रचार पर न जाएं, हकीकत में कुछ करके दिखाएं

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बरेली। पूरा सिस्टम नया वोट बनवाने और मतदान कराने पर जोर दे रहा है, लेकिन यहां नए वोट बनना तो दूर डुप्लीकेट और संशोधित फोटो वोटर आईडी कार्ड ही नहीं बन पा रहे हैं। पिछले दो साल पहले बने कार्डों का वितरण ही नहीं हुआ, तर्क है कि चेन्नई से छपकर नहीं आए हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय में कोई कुछ जानकारी तक नहीं दे पा रहा है। संबंधित अफसर अपने कार्यालयों में बैठ नहीं रहे हैं। इससे दिन भर लोग परेशान होकर लौट रहे हैं।
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पिछले दो सालों में सवा लाख से ज्यादा नए वोट बने हैं, लेकिन उनको अभी मतदाता फोटो परिचय पत्र ही नहीं मिल पाया है। उधर, निर्वाचन ने वोटर पर्ची से मतदान करने पर रोक लगा दी है, ऐसे नए वोटर कैसे मतदान कर पाएंगे? जबकि पूरा सिस्टम ज्यादा से ज्यादा मतदान कराने पर जोर लगा रहा है, कागजी अभियान पर चल रहे हैं। नए वोट 28 मार्च तक बनाए जाने हैं, लोग आवेदन करने के लिए फार्म छह पाने के लिए इलेक्शन दफ्तर में चक्कर लगा रहे हैं। यही स्थिति डुप्लीकेट वोटर कार्ड में बनी हुई है। तहसील सदर में संबंधित स्टाफ आनलाइन आवेदन करने के लिए सलाह दे रहा। लेकिन इलेक्शन कमीशन वेबसाइट पर डुप्लीकेट वोटर कार्ड बनवाने के लिए 001 कोड पर आवेदन किया जाता है तो वह खुल ही नहीं रही है। बीआरसी कार्यालय में सुपरवाइजर योगेंद्र आजाद इस अस्तव्यस्त सिस्टम से खुद परेशान हैं, क्योंकि हर दिन बड़ी तादाद में लोग डुप्लीकेट और नए वोटर कार्ड पाने के लिए पहुंच रहे हैं।

रसीद बुक नहीं छपवाई
लापरवाही और मनमानी की हद तो यह है कि अभी तक उप निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने डुप्लीकेट वोटर कार्ड पाने वालों के लिए रसीद बुक ही नहीं छपवाई है। निर्वाचन आयोग ने 25 रुपये नकद जमा कर अथवा सीधे आनलाइन आवेदन कर डुप्लीकेट कार्ड बनवाया जा सकता है। कई दिनों वेबसाइट खुल नहीं रही है। इस पर हर दिन कार्यालय में हंगामा हो रहे हैं। जबकि नए कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ एक दिन ही बचा है।
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ढाई साल से सहायक निर्वाचन अधिकारी तक नहीं
सिस्टम निर्वाचन प्रक्रिया कितनी गंभीरता से ले रहा है, इसका उदाहरण पिछले करीब ढाई सालों से खाली पड़ा सहायक निर्वाचन अधिकारी पद है। वैकल्पिक तौर पर एसीएम थर्ड राजेश चंद को निर्वाचन कार्यालय में बैठाया गया है, लेकिन उन्हें कुछ जानकारी ही नहीं है।
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