‘किताबी ज्ञान नहीं छात्रों को काबिल बनाने वाली हो शिक्षा’
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बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग और इंडियन एसोसिएशन ऑफ टीचर एजुकेशन की ओर से ‘इंडियन टीचर एजूकेशन एट क्रासरोड्स: विदेरटो’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षाविदों नेे उच्च शिक्षा के ढांचे में बदलाव करने पर जोर दिया। कहा कि किताबी ज्ञान नहीं बल्कि छात्रों को काबिल बनाने वाली हमारी शिक्षा होनी चाहिए। शिक्षक और छात्रों के बीच दूरी बढ़ गई है जिसे खत्म करना बेहद जरूरी है। शिक्षाविदों ने शिक्षा प्रणाली में बदलाव अपर अपने सुझाव दिए।
सम्मेलन के निदेशक प्रोफेसर एनएन पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य वक्ता सीआईटी दिल्ली के प्रोफेसर डीआर गोयल ने मन एवं मस्तिष्क के समन्वय की बात कही। शिक्षा में न्यायिक अतिक्रमण एवं राज्य निर्देशों को बाधक बताया। शिक्षा को मशीन बनने से रोकना होगा। छात्र केंद्रित शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया। कहा कि सिर्फ किताबी ज्ञान से किसी छात्र को काबिल नहीं बनाया जा सकता। छात्र के हुनर को परखकर उसे निखारने की जरूरत है।
कोटा मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक शर्मा ने प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया। बोले, शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे छात्र का संपूर्ण विकास हो। मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मियां ने कहा कि देश में आईआईटी और आईआईएम की तरह आईआईई शुरू होना चाहिए। सरकारी स्कूलों की दशा सुधारनी होगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने शिक्षा को प्रतिद्वंद्वी न होकर सहयोगी होनेे को कहा। छात्रों पर किताबी ज्ञान थोपने के बजाए उनकी काबलियत को निखारने पर जोर दिया। आईएटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर रमेश घंटा ने अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षक बनाने पर जोर दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर पीके साहू ने प्रदूषण मुक्त शिक्षा, सूक्ष्म शिक्षण, अधिगम परिवर्तन, ब्रेन बेस्ड लर्निंग, निर्णयकारी शिक्षा पर जोर दिया। संगोष्ठी में 60 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इसमें 12 विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कालर ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रोफेसर बीआर कुकरेती, प्रोफेसर सुमित्रा कुकरेती, प्रोफेसर संतोष अरोरा, प्रोफेसर केके चौधरी, प्रोफेसर एसके वर्मा, प्रोफेसर संजीव आदि मौजूद रहे।