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अनाथालय जमीन प्रकरण- सिटी मजिस्ट्रेट ने जमीन की रजिस्ट्री का मूल रिकॉर्ड किया तलब

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बरेली। खतौनी में फर्जीवाड़ा कर नवाबगंज में सौ बीघा जमीन की मिल्कियत बदल दिए जाने वाले मामले जैसी गड़बड़ी आर्य समाज अनाथालय की जमीन के बैनामे पर तो नहीं की गई है, इस आशंका के चलते सिटी मजिस्ट्रेट ने रजिस्ट्री विभाग से अनाथालय की जमीन संबंधी रिकार्ड तलब कर लिए हैं। दरअसल अनाथालय की जमीन पर दावा करने पक्ष अपने पक्ष जिस वर्ष रजिस्ट्री होना बता रहा है, सरकारी रिकार्ड के मुताबिक जमीन के कथित मालिक की उससे पहले ही मौत हो चुकी थी। इसी के चलते अनाथालय के रिक़ॉर्ड की जांच का निर्णय लिया गया है।
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हाल में एक बार फिर आर्य समाज अनाथालय की 8694 गज जमीन के स्वामित्व का विवाद शुरू हुआ है। अनाथालय की इस बेशकीमती जमीन को लेकर एक पक्ष ने यह दावा किया है कि उसने वर्ष 1972 में जमीन के मालिक मुंशी मुन्नाजान से इसकी रजिस्ट्री कराई थी। मामले की जांच शुरू हुई तो कई संदिग्ध तथ्य सामने आए। चूंकि सिटी मजिस्ट्रेट को अनाथालय की जमीन पर दावा करने वाले पक्ष ने बैनामे के कागजों की फोटो प्रतियां ही मुहैया कराई हैं, इसलिए आशंका पैदा हो रही है कि रजिस्ट्री के कागजों में कोई हेराफेरी तो नहीं की गई है। इसकी जांच करने के लिए रजिस्ट्री विभाग से इन बैनामों के मूल रिकॉर्ड मांगे गए हैं। इन पर मुंशी मुन्नाजान के दस्तखत का मिलान कराने के साथ और भी जरूरी सत्यापन भी कराया जा रहा है।

जमीन विवाद जांच में अब विपक्षी के बैनामे की होनी है जांच
अनाथालय प्रबंधन का कहना है कि उसने यह जमीन मुंशी मुन्नाजान से वर्ष 1927 में खरीदी थी और उसके पास इस संपत्ति का बैनामा भी है। पिछले साल जनवरी में दूसरे पक्ष ने इस जमीन पर अपना दावा ठोका था, साथ ही यहां दीवार बनाकर जमीन पर कब्जा करने की भी कोशिश की थी। इस पक्ष का कहना है कि इस जमीन का बैनामा मुंशी मुन्नाजान ने वर्ष 1972 में उनके नाम किया था। बाद में यह मामला कोर्ट में चला गया। हाल में फिर से इसी जमीन पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश हुई तो अनाथालय प्रबंधन की शिकायत पर डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला को जांच का आदेश दिया। इस जांच में सामने आया कि मुंशी मुन्नाजान की बीवी ने 1952 में एक दूसरी संपत्ति का बैनाम किया था। इसमें उन्होंने खुद को बेवा होने का जिक्र किया है। ऐसे में सवाल यह है कि मुंशी मुन्नाजान का जब 1952 में ही इंतकाल हो चुका था तो 1972 में उनकी ओर से रजिस्ट्री कैसे हो गई।
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निबंधन विभाग से अनाथालय की जमीन के रिकार्ड मांगे गए हैं। मुझे आशंका है कि इस जमीन पर हक जा रहे दूसरे पक्ष ने बैनामे में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं की। इसकी छानबीन कराई जा रही है। -अशोक कुमार शुक्ला, सिटी मजिस्ट्रेट
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